मिल में बिजली बनाने के लिए लगी टर्बाइन
मुंडेरवा की नई चीनी मिल में सेटिंग शुरू, लगेंगे दो माह
जेनरेटर और बिजली खरीद कर पेराई के लिए चलाई थी मिल
अमर उजाला ब्यूरो
मुंडेरवा। नवनिर्मित शुगर मिल में बुधवार से टर्बाइन की सेटिंग शुरू हो गई। करीब दो से ढाई महीने बाद ही सुचारु रूप से कार्य कर सकेगी। टर्बाइन का मुख्य प्रयोग बिजली उत्पादन का है। मिल के ट्रायल के लिए बिजली खरीदने के साथ ही जेनरेटर का सहारा लिया गया था।
बुधवार को नवनिर्मित शुगर मिल में टर्बाइन को उसके फाउंडेशन पर सेट कर दिया गया। एक माह पहले बंगलूरू से चली टर्बाइन 16 मई को मुंडेरवा मिल परिसर पहुंची थी। चौड़ाई अधिक होने के कारण शुगर मिल गेट को तोड़ना पड़ा था। एक सप्ताह में कार्यदायी संस्था इसजेक के इंजीनियर ने परिसर में इसे सेट किया। इसजेक के प्रोजेक्ट हेड सुरेश सिंह चौहान और प्रोजेक्ट मैनेजर नवीन शुक्ल ने बताया कि टर्बाइन को दो से ढाई माह लगेंगे सेट होने और सुचारु रूप से कार्य करने में। दोनों जिम्मेदार अधिकारियों ने बताया कि टर्बाइन को उठाकर फाउंडेशन पर रखने के लिए अलग से हैवी क्षमता का क्रेन बंगलूरू से मंगाना पड़ा है। जीएम ब्रजेन्द्र द्विवेदी ने बताया कि नवनिर्मित शुगर मिल में 15 अप्रैल से ट्रायल के तौर पर गन्ना पेराई शुरू हुई थी। पेराई सत्र में जेनरेटर से और बिजली खरीद कर मिल मिल चलाई गई है। टर्बाइन के लगने से अगले पेराई सत्र में गन्ने से निकले बगास से टर्बाइन के माध्यम से 27 मेगावाट बिजली उत्पन्न की जाएगी। इसमें से आठ मेगावाट बिजली शुगर मिल चलाने में उपयोग की जाएगी और बाकी के 19 मेगावाट बिजली को उत्तर प्रदेश विद्युत कार्पोरेशन को बेची जाएगी और उससे मिलने वाले धन को गन्ना किसानों को मूल्य भुगतान किया जाएगा।