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धान खरीद पर खींचतान, सचिव आंदोलन के मूड में

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धान खरीद पर खींचतान, सचिव आंदोलन के मूड में
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राइस मिलर पहले ही खींच चुके हैं हाथ, अनुबंध को तैयार नहीं
पहली नवंबर से सचिव मांगों के समर्थन में करेंगे ताला बंदी
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। धान खरीद के मामले में सरकारी कवायद के बीच बाधा बन कर खड़े राइस मिलरों के बाद सचिवों ने भी आंदोलन का मन बनाया है। पहली नवंबर से वह कामकाज ठप कर समितियों पर ताला बंदी करेंगे। ऐसे में धान खरीद प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई है।
सरकार ने धान खरीद के लिए यह व्यवस्था बनाई है कि सभी राइस मिलें इस बार क्रय केंद्रों से संबद्ध होंगी। हालांकि विभाग इन्हें संबद्धीकरण करने की योजना बना ही रहा था कि राइस मिलर एसोसिएशन ने अनुबंध को एक पक्षीय बताते हुए मनमाने ढंग से जबरन कार्य लिए जाने का आरोप लगाते हुए इसका विरोध शुरू कर दिया। मांग उठाई कि अनुबंध में चावल की रिकवरी 56 प्रतिशत करने, धान की आर्द्रता 13 प्रतिशत तथा भंडारण के लिए तत्काल उतार किए जाने की व्यवस्था संबंधी शर्तें मंजूर की जाएं। इसके अलावा पूर्वांचल पैकेज की भी एसोसिएशन ने मांग रखी। ऐसा न करने पर इस बार राइस मिल संचालकों ने धान खरीद में सहयोग से मना कर दिया है। हालांकि अभी इस मसले पर अधिकारियों से बातचीत चल ही रही है कि बृहस्पतिवार को संयुक्त सहकारी समिति कर्मचारी समन्वय समिति ने सचिवों को राज्य कर्मी का दर्जा दिए जाने सहित तीन मांगें रख दी। समिति ने मांगें पूरी न होने पर 29 अक्तूबर को कलेक्ट्रेट पर धरना और पहली नवंबर से कामकाज ठप करने की चेतावनी भी दी है। धान खरीद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इन दोनों संगठनों की तरफ से आंदोलन की चेतावनी दिए जाने से धान खरीद की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई है।
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डिप्टी आरएमओ गोरखनाथ त्रिपाठी ने बताया कि राइस मिलरों के आंदोलन की जानकारी तो है, मगर सचिव भी हड़ताल पर जा रहे हैं, इसकी उन्हें कोई सूचना नहीं है। यह दोनों घटक धान खरीद में अहम भूमिका निभाएंगे। ऐसे में इनके आंदोलन का असर धान खरीद पर नहीं होने दिया जाएगा।
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