फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फोटो... हौज-ए-कौसा के बदले नमाज और कुर्बानी

विज्ञापन
विज्ञापन
फोटो...
विज्ञापन

ईदगाहों, मस्जिदों में अदा की गई बकरीद की नमाज
शांतिपूर्ण माहौल में मनाई गई बकरीद, कुर्बानी तीन दिन
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। हमने तुम्हें हौज-ए-कौसा दिया तो तुम अपने अल्लाह के लिए नमाज पढ़ो, कुर्बानी करो...। कुरान में लिखी इस इबारत को अमल में लाते हुए हजरत इब्राहिम और परवर दिगार के बीच आजमाइश की याद में बुधवार को पारंपरिक ढंग से बकरीद मनाई गई। शहर से लेकर कस्बों व ग्रामीण क्षेत्र की मस्जिदों, ईदगाहों व अन्य सार्वजनिक स्थलों पर परंपरा के मुताबिक नमाज अदा की गई। तीन दिन तक चलने वाली कुर्बानियों का सिलसिला भी शुरू हुआ। कमिश्नर डॉ. अलका टंडन भटनागर, डीआईजी आशुतोष कुमार, डीएम डॉ. राजशेखर और एसपी दिलीप कुमार पुलिस व प्रशासनिक कंट्रोलरूम से कुर्बानी और नमाज की सूचनाएं लेते रहे।
शहर की जामा मस्जिद गांधीनगर, दारूल उलूम, खैरुल उलूम, जामिया हनफिया, नूरानी मस्जिद, मस्जिद निसार हुसैन, हुसैनी मस्जिद, अंजुमन अजमेरी मस्जिद मंगलबाजार, मस्जिद डफाली टोला, कादरी मस्जिद मुरलीजोत, कर्बला मस्जिद जिला अस्पताल, पठान टोला मस्जिद, जामा मस्जिद पुरानी बस्ती, मस्जिद दक्षिण दरवाजा, छोटी मस्जिद पक्के बाजार, दरियां खां, मस्जिद बेलाल, गड़गोडिया, माली टोला, आगा दरिया खां मस्जिद, अंजुमन मस्जिद पुरानी बस्ती, अरबिया गौसिया मस्जिद पुरानी बस्ती, डफाली टोला मस्जिद आदि में बकरीद की नमाज अकीदत के साथ अदा की गई। दोपहर से पहले ज्यादातर स्थानों पर शांतिपूर्ण माहौल में नमाज अदा हो जाने पर प्रशासनिक अमले ने राहत की सांस ली। बताया जा रहा है कि कुर्बानी का सिलसिला जहां-तहां तीन दिन तक चलता है। ऐसे स्थानों पर पुलिस प्रशासन की नजर बनी हुई है। अधिकारियों की तरफ से किसी भी असामाजिक गतिविधियों पर गंभीरता से कदम उठाने की हिदायत दी गई है।
विज्ञापन

बकरा काटने वालों की पौ-बारह
बकरीद पर कुर्बानी से कसाइयों (बकरा काटने वालों) की पौ बारह रही। लोगों ने एक हजार से लेकर 1500 से दो हजार रुपये कसाइयों को देकर कुर्बानी कराई। यही वजह रही कि देर रात तक बकरे काटने का सिलसिला चलता रहा। कुछ स्थानों पर तीन दिन तक कुर्बानी होगी। इस बीच बकरे काटने वाले नगर बाके इद्रीस कुरैशी, इब्राहिम, कुसौरा के रमजान आदि ने बताया कि कुर्बानी के लिए बाकायदा बुकिंग कराई है। दो-तीन महीने पहले से इसका मेहनताना तय करने के बाद पेशगी यानी बयाना दिया जाता है। जिसके पास ज्यादा बुकिंग रहती है वह अपने मित्र-दोस्त और रिश्तेदारी से कुर्बानी करने की जानकारी रखने वाले युवकों को बुलाता है। इन तीन दिनों में बकरे काटने के प्रत्येक कसाई की कम से कम पांच और अधिकतम 25 हजार तक की कमाई हो जाती है।
विज्ञापन


काम आई अपील
महीने भर से सद्भाव की अपील का असर रहा कि इस बार रास्तों और सार्वजनिक जगहों पर कुर्बानी से परहेज किया गया। खून नाली में बहने से बचाने की कोशिश के बीच देखा गया कि सींघ, ओजड़ी आदि निष्प्रयोज्य मांस-अंग इधर-उधर फेंकने के बजाए दफन किया गया। दूसरों के जज्बातों का ख्याल रखने और गंदगी न फैलाने की नसीहत भी काफी काम आई।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें