भानपुर (बस्ती)। अपने निजी स्वार्थों के लिए यहां के एक किसान ने तहसीलदार का जाली दस्तखत बना करके किसान प्रमाण पत्र हासिल किया। जिसका उपयोग उसने राजस्व विभाग महाराष्ट्र में किया। प्रमाण पत्र की सत्यता को जानने के लिए महाराष्ट्र के राजस्व विभाग ने यहां के तहसीलदार को पत्र लिखा, जिसकी जांच भानपुर तहसीलदार ने करवाई तो पता चला उनका जाली दस्तखत बनाया गया है। इसके बाद उन्होंने किसान के खिलाफ केस दर्ज करवाया है। हालांकि किसान अभी महाराष्ट्र में हैं।
यहां का किसान रामचरन निवासी पिरैला नरहरिया थाना सोनहा जिला बस्ती ने तहसीलदार कार्यालय कल्याण महाराष्ट्र में किसान प्रमाण पत्र दाखिल करते हुए बताया, कि वह उत्तर-प्रदेश का किसान है। इस पर तहसीलदार कार्यालय कल्याण महाराष्ट्र ने भानपुर तहसीलदार को एक पत्र लिखकर पूछा, रामचरन वास्तव में किसान है अथवा नहीं। इसके बाद तहसीलदार भानपुर ने किसान प्रमाण पत्र की अपने कर्मचारियों से जांच करवाई तो पता चला कि किसान प्रमाण पत्र बनवाने के लिए उनके दफ्तर में 16 फरवरी 2018 को आवेदन किया गया था। आवेदन पत्र को जांच के लिए उन्होंने लेखपाल और कानूनगो को दे दिया था। हल्का लेखपाल सर्वजीत चौधरी ने 25 फरवरी को अपनी रिपोर्ट लगा दी। मगर राजस्व निरीक्षक और उन्होंने कोई रिपोर्ट नहीं लगाई, न ही हस्ताक्षर किया। बावजूद इसके किसान प्रमाण पत्र पर उनका हस्ताक्षर किया गया है और पत्रांक 807/18 डाला गया है। इस पर तहसीलदार का माथा ठनका। उन्होंने तहसील के रजिस्टर को चेक किया तो मालूम हुआ अभी तो डिस्पैच रजिस्ट्रर में वर्तमान क्रमांक 351 चल रहा है।