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उल्टी दस्त से बीमार की गोरखपुर मेडिकल कालेज में मौत

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उल्टी दस्त से बीमार की मौत
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बस्ती।
शहर के पिकौरा बक्स निवासी मजीद के 15 वर्षीय पुत्र की उल्टी-दस्त से मंगलवार की सुबह मौत हो गई। उसे गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में तीन सितंबर की शाम भर्ती कराया गया था। यहां हालत खराब होने पर डॉक्टरों ने लखनऊ रेफर कर दिया। वहां जाने से पहले ही बच्चे ने बेड पर ही दम तोड़ दिया।
पिकौरा बक्स निवासी 15 वर्षीय शोएब को 30 अगस्त की सुबह उल्टी-दस्त शुरू हो गई। परिवार के लोग उसे लेकर एक निजी डॉक्टर के पास पहुंचे। डॉक्टर ने उसे भर्ती कर इलाज शुरू किया। एक सितंबर को डॉक्टर ने उसे घर जाने दिया। दोपहर तक तो वह ठीक रहा मगर उसके बाद उल्टी-दस्त फिर से शुरू हो गई। देखते ही देखते वह निढाल होकर गिर पड़ा। बेटे की स्थिति देख पिता मजीद बेहाल हो गया और फिर से निजी डॉक्टर के पास लेकर पहुंचा, मगर दवा आदि देकर उन्होंने घर जाने के लिए कह दिया। रात को उसे लगातार दस्त होता रहा। इससे वह बेहोश हो गया। घर वाले उसे लेकर जिला अस्पताल भागे, जहां डॉक्टर ने उसका इलाज शुरू किया। काफी प्रयास के बाद भी दस्त नहीं रुका तो डॉक्टर ने उसे गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। गोरखपुर में उसे इमरजेंसी में भर्ती करने के बाद आईसीयू में भेज दिया गया। इस दौरान उसे दो बार दस्त के साथ खून भी निकला। इसे डॉक्टरों को तीमारदार ने बताया। डॉक्टर ने उसका इलाज किया मगर सुबह उसकी हालत बिगड़ने लगी। इस पर उसे तत्काल केजीएमयू लखनऊ रेफर कर दिया। वहां ले जाने की तैयारी परिवार के लोग कर ही रहे थे कि उसकी मौत हो गई।
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अब आंखों में हो रहा वायरल इन्फेक्शन

बभनान।
बरसात के मौसम के बाद नमी युक्त गर्मी और वातावरण में चारों ओर व्याप्त गंदगी से उठने वाली दुर्गंध स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो रही है। इसके चलते डायरिया और वायरल फीवर जैसी बीमारियों की तरह आंखों में भी वायरल इंफेक्शन हो रहा है। इससे स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रतिदिन मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
तेज धूप के बाद एक-दो दिनों में हो रही बारिश लोगों की सेहत को प्रभावित कर रहा है। इसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है। इस मौसम में लोगों को अपनी आंखों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। क्योंकि आंखों में वायरल इंफेक्शन हो रहा है। बरसात के मौसम में तेज धूप और नमीयुक्त मौसम के चलते लोगों की आंखों लाल हो रही हैं। दर्द भी हो रहा है। क्षेत्र के केसरई के सौर प्रताप यादव, बभनान के बजंरगी, बभनगावा खुरद की नीलम, विपिन, कंचनपुर के अनिल सहित अन्य लोगों ने बताया कि इस समय बुखार से ज्यादा आंखों को लेकर परेशान होना पड़ रहा है। पहले आंख लाल हो जाती है। उसके दो दिन बाद दर्द होना शुरू हो जाता है। ऐसे में कहीं आने-जाने और देखने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मरीज अपनी आंखों की दवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गौर, पीएचसी बभनान, हरदी सहित नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों से करा रहे हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य गौर के नेत्र परीक्षण अधिकारी डॉक्टर हरिश्चंद्र यादव ने बताया कि इस मौसम में बरसात के बाद तेज धूप निकलती है तो जलजमाव वाले स्थान सूखने लगते हैं। इसके चलते आंखों में वायरल इंफेक्शन होता है। यह मौसम बैक्टीरिया और वायरल के लिए एकदम अनुकूल है। यह वायरल के रूप में आंखों में लापरवाही बरतने पर मरीजों की आंखों में फंगस इंफेक्शन हो सकता है। इससे भविष्य में आंखों की रोशनी पर प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में सावधानी कारगर उपाय है।
रोगों के लक्षण
आंखों का लाल होना, आंखों से कीचड़ या पानी आना, आंखों में चुभन होना, तेज धूप बर्दाश्त न होना।
डॉक्टर की सलाह
धूप में चश्मा पहन कर निकले, रोगी के सामान का प्रयोग न करें, आंखों में कुछ होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, रोगी के संपर्क में आने से हाथ साबुन से धोए।


दवा, डॉक्टरों की कमी से मरीजों की सांसत

बस्ती।
सरकार है कि स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी को लेकर मशक्कत कर रही है, मगर जिला मुख्यालय पर स्थित जिला अस्पताल बजट के बावजूद दवाओं की किल्लत से जूझ रहा है। इसके अलावा नियतन के सापेक्ष आधा से कम डॉक्टरों की मौजूदगी मरीजों के लिए परेशानी का कारण है। दवाओं की कमी मरीजों को बाहर से दवा खरीदने पर मजबूर कर रही है तो डॉक्टरों की कमी के चलते मरीजों को भी दिक्कत उठानी पड़ रही है।
जिला अस्पताल की स्थापना 1935 में अंग्रेजी हुकूमत में हुई थी। तब यह महज दस शैय्या युक्त था। समय बदला तो इसका भी स्वरूप बदल गया। छह साल पूर्व तक यह महज 250 शैय्यायुक्त था मगर वर्ष 2011 में इसे 300 शैय्यायुक्त कर दिया गया। डॅाक्टरों की कमी को लेकर कई सालों से अस्पताल का प्रबंधन परेशान है मगर इसका कोई निदान नहीं निकल पा रहा है।
इन विभागों पर ताला
जिला अस्पताल में ह्दयरोग विभाग, मनोरोग, यूरो सर्जन, प्लास्टिक सर्जन, न्यूूरो फिजीशियन, रक्त कोष चिकित्साधिकारी और चिकित्सा अधीक्षक के कुल 25 पद रिक्त हैं। इन पदों पर तैनाती के लिए तमाम प्रयास के बाद परिणाम शून्य है।
ये हैं सुविधाएं
जिला अस्पताल में आम लोगों को निश्शुल्क उपलब्ध सुविधाएं ब्लड बैंक, पैथॉलॉजी, एक्सरे, डिजिटल एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, जेई सेंटीनल लैब, पीआईसीयू, मेजर ओटी, माइनर ओटी और इमरजेंसी ओटी तो अस्पताल संचालित करता है जबकि यूपी सेक और नार्कों आईसीटीसी, एआरटी, ओएसटी, एसटीआई संचालित कर रहा है। यही नहीं एनएचएम भी सात कार्यक्रम संचालित कर रहा है। जो पूरी तरह मुफ्त है।
बजट की कमी नहीं, दवाओं का टोटा
जिला अस्पताल को संचालित करने के लिए एक करोड़ सत्रह लाख रुपये का बजट मिला है। इस धन में से 53.77 लाख दवाओं पर खर्च किया जा चुका है। बावजूद इसके दो माह पूर्व जब स्थायी एसआईसी रिटायर हुए तो दवाओं की कमी शुरू हो गई। कारण यह कि जिसको भी प्रभार मिला उसके पास आहरण-वितरण का अधिकार नहीं था। ऐसे में दो माह पूर्व यहां दवाएं करीब-करीब खत्म हो गईं।
इनका दर्द सुनते नहीं जिम्मेदार
पाकरडांड के 55 वर्षीय नाटे क्षेत्रीय निदान केंद्र में खून जांच कराने पहुंचे थे। कहते हैं कि डॉक्टर को तो दिखा लिया मगर जांच करने के लिए अब दूसरे दिन का समय दिया जा रहा है। ऐसे में मजबूरन बाहर किसी पैथॉलॉजी पर जांच कराना पड़ेगा। बच्चे का इलाज कराने आए किशुनपुर गांव निवासी कलंदर यादव कहते हैं कि यहां डॉक्टर, दवा माफिया और पैथॉलॉजी सेंटरों के संचालकों की मिलीभगत से मरीजों को लूटा जा रहा है। कहते हैं कि बच्चे को भर्ती कराए थे मगर अब वह ठीक जरूर हो गया मगर चार हजार रुपये खर्च हो गए। गरीबों की सुनने वाला कोई नहीं है।
दुबौलिया निवासी अनिल सिंह कहते हैं कि वे पिता को लेकर आए थे। जांच के लिए गए, मगर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। यहां केवल औपचारिकता निभाई जा रही है।
परसांव निवासी रामजीत ने कहा कि उनकी मां की तबीयत खराब है। अस्पताल में भर्ती कराए, मगर परेशानी बढ़ गई तो डॉक्टर से बताया, मगर उन्होंने रेफर कर दिया।
एसआईसी बोले
प्रमुख अधीक्षक डॉ. एके श्रीवास्तव ने कहा कि अभी सप्ताह भर पूर्व तैनाती मिली है। अस्पताल की व्यवस्था को सुधारने के लिए समीक्षा कर रहा हूं। दवाओं की कमी दूर करने के लिए 25 लाख का आरओ भेजा जा चुका है। अभी दवाएं आई नहीं है। वैसे जिला अस्पताल में 107 श्रेणी की दवाएं मौजूद हैं। ज्यादातर उल्टी-दस्त, बुखार, एंटीबॉयोटिक, फंगल संक्रमण आदि की हैं।
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डॉक्टर सहित चार के खिलाफ केस होगा
साउंघाट सीएचसी पर प्रसूता की मौत का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। सीएचसी साऊंघाट पर तैनात डॉक्टर और एएनएम सहित कोर्ट ने चार के खिलाफ पुरानी बस्ती एसओ को केस दर्ज करने का आदेश दिया है। इसमें वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के भेलभरिया गांव निवासी फूलचंद पटवा ने एडवोकेट वेदव्रत शुक्ला के माध्यम से कोर्ट में वाद दाखिल किया। बताया कि वह प्रसव पीड़ा होने पर 16 अप्रैल 2017 को रात्रि में 108 एंबुलेंस से पुत्रवधू शकुंतला को सीएचसी सांऊघाट ले गए। जहां पर स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि सब कुछ ठीक है। अस्पताल में ही समुचित इलाज होने की बात कही। मगर जोर जबरदस्ती के कारण रात में ढाई बजे मरा हुआ बच्चा पैदा हुआ। शरीर में असहनीय पीड़ा होने पर एएनएम और एचबी ने इंजेक्शन लगा दिया। इससे दर्द और बढ़ गया साथ ही अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा। हालत गंभीर होने पर स्वास्थ्य कर्मचारियों ने पुत्रवधू को जिला महिला अस्पताल भेज दिया। लेकिन रास्ते में ही बहू की मौत हो गई। अस्पताल पर तैनात कर्मचारियों की घोर लापरवाही से प्रार्थी ने बहू और होने वाले बच्चे को खो दिया। पुलिस में शिकायत के बाद प्रार्थी ने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय ने वादी फूलचंद पटवा पुत्र स्व. पारसनाथ के वाद में सीएचसी पर तैनात डॉक्टर राकेश मणि त्रिपाठी, हेल्थ विजिटर लिलम्मा, एएनएम मंजू चौधरी और दाई के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश पुलिस को दिया।
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