कल रात से ‘लॉक’ हो जाएगा फोरलेन
बस्ती।
इस हफ्ते गोरखपुर-लखनऊ फोरलेन पर यात्रा करनी हो तो सोच-विचार कर प्लान कीजिएगा, वर्ना मुश्किल में पड़ सकते हैं। कांवड़ यात्रा को लेकर 18 जुलाई की रात आठ बजे से 21 जुलाई तक यातायात डायवर्ट रहेगा। बस्ती से अयोध्या के बीच किसी भी तरह के बड़े वाहन नहीं गुजरने पाएंगे। 19 की शाम तक हाईवे पर ज्यादा प्रेशर न होने की स्थिति में बाइक और छोटे वाहन गुजरने की ढील दी जा सकती है, लेकिन उसके बाद से हाईवे पूरी तरह से सील रहेगा।
भद्रेश्वरनाथ में जलाभिषेक करने वाले कांवड़ यात्री दो दिन पहले अयोध्या रवाना होते हैं। नए घाट से सरयू का जल लेकर शिवरात्रि पर अभिषेक करते हैं। अयोध्या से भद्रेश्वरनाथ के बीच करीब 85 किलोमीटर की कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक होता है। उस दिन सड़कों पर सिर्फ कांवड़ियों का रेला नजर आता है। इसके चलते हाईवे पर वाहनों का आवागमन बंद रहेगा। रोडवेज बसों का रास्ता बदल कर गोरखपुर, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, गोंडा, अंबेडकर नगर के रास्ते हो जाएगा। नेशनल हाईवे की ओर आने वाले वाहनों को विभिन्न मार्गों पर डायवर्ट कर दिया जाएगा।
इस तरह होगा डायवर्जन
गोरखपुर की ओर से आने वाले सभी वाहनों को खलीलाबाद से डायवर्ट करके बखिरा, नंदौर, खेसरहा, बांसी की ओर से होकर भेजा जाएगा। कुछ वाहनों को बस्ती, बड़ेवन से मनौरी, बेवा चौराहा, उतरौला, गोंडा होते हुए लखनऊ तक चलाया जाएगा।
लखनऊ, फैजाबाद की ओर से आने वाले वाहनों में कटरा, लकड़मंडी से नवाबगंज, मनकापुर की ओर एवं गोंडा से आने वाले वाहनों को नवाबगंज से ही डायवर्ट करके मनकापुर, उतरौला, डुमरियागंज, बांसी, नन्दौर, बखिरा होते हुए गोरखपुर भेजे जाने की व्यवस्था की गई है।
फैजाबाद की ओर से आने वाले वाहनों को कटरा अयोध्या, लकड़मंडी से नवाबगंज, मनकापुर की ओर मोड़ दिया जाएगा। जबकि गोंडा से आने वाले वाहनों को नवाबगंज से ही डायवर्ट करके मनकापुर, उतरौला, डुमरियागंज, बांसी, नंदौर, बखिरा होते हुए गोरखपुर आने दिया जाएगा।
गोरखपुर से लखनऊ की ओर जाने वाले कुछ वाहन, जो खलीलाबाद से नहीं डायवर्ट होंगे उन्हें बड़ेवन से मनौरी, बेवा चौराहा (डुमरियागंज) से उतरौला, गोंडा होते हुए लखनऊ रवाना किया जाएगा।
कप्तान बोले, कस कर बांधो गांठ
हफ्ते भर में तीसरी बार भद्रेश्वरनाथ मंदिर की तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे एसपी संकल्प शर्मा ने रविवार को बैरिकेडिंग का मुआयना किया। गर्भगृह के इर्द-गिर्द लगाई जा रही बल्लियों को हिलाकर देखा। एसपी ने मजदूरों से गांठ कस कर बांधने को कहा। असल में मंदिर परिसर की ऊबड़-खाबड़ जमीन पर जुटे लाखों कांवड़ियों के हुजूम को संभालना पुलिस प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है। इसलिए पुलिस-प्रशासन कोई भी जोखिम लेना नहीं चाहता।