बस्ती। उद्योग के लिए आवंटित भूखंड पर दूसरा काम करते पाए गए 15 आवंटियों का अलाटमेंट निरस्त कर दिया गया। बुधवार को उद्योग बंधु समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। कमेटी के अध्यक्ष/डीएम डॉ. राजशेखर ने जिला प्रबंधक उद्योग को संबंधित एसडीएम को उक्त प्लॉट से 15 दिन के भीतर भौतिक कब्जा हटवाने के लिए अधिकृत किया है।
इनमें गनेशपुर, भदावल और पाऊं के तीन मिनी औद्योगिक क्षेत्रों के 15 आवंटियों का आवंटन रद्द हुआ है। डीएम के अनुसार अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन किया गया है। पर्याप्त अवसर देने के बाद भी पिछले 12 से 13 वर्षों से औद्योगिक कार्य शुरू नहीं किया। 78 ऐसे आवंटियों को तीन महीने का समय दिया गया है, जिन्होंने आंशिक रूप से औद्योगिक कार्य शुरू तो किया लेकिन पूरी तरह क्रियाशील नहीं कराए गए। उन्हें अक्तूबर माह तक 40 प्रतिशत, नवंबर तक 60 और दिसंबर तक शत-प्रतिशत क्रियाशील कर देना है। वरना उनका भी आवंटन रद्द कर दिया जाएगा। यूपीएसआईडीसी ने बस्ती औद्योगिक क्षेत्र में 135 औद्योगिक भूखंड आवंटित किया है। इनमें केवल 69 ही उत्पादन कर रहे हैं। 52 पर का काम बंद है और नौ निर्माणाधीन हैं। सभी 52 अक्रियाशील प्लॉट के निरस्त करन के लिए भी नोटिस दिया जा रहा है। अगले तीन महीनों में यदि काम नहीं शुरू हुआ तो आवंटन रद्द कर दिया जाएगा।
इस दौरान सीडीओ अरविंद पांडेय, जिला प्रबंधक उद्योग, एलडीएम, आईटीआई प्रिंसिपल, औद्योगिक घरानों के प्रतिनिधियों, ईओ नगर पालिका, यूपीएसआईडीसी, वन विभाग के अधिकारियों, उपायुक्त वाणिज्यिक कर, श्रम विभाग के अधिकारियों और अन्य अधिकारियों ने बैठक में भाग लिया गया।
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नए डीपीआर तैयार करने की पहल
- डीएम ने डीसी उद्योग को 15 अक्टूबर तक धोबहिया (गौर), रेहल जंगल (सल्टौआ) और परसोहिया (राम नगर) के लघु औद्योगिक परिसरों के लिए डीपीआर तैयार करने के लिए निर्देशित किया। साथ ही वहां आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए उद्योग विभाग से फॅंड स्वीकृति के लिए उसे भेजें। ताकि वह उन भूखंडों का आवंटन किया जा सके।
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काष्ठकला को बढ़ावा पर जोर
- %एक जिला एक उत्पाद% (ओडीओपी) योजना में ऋण और प्रदर्शन को बढ़ावा देने के लिए, उद्योग बंधु कमेटी ने अक्टूबर माह में आईटीआई परिसर में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित करने का निर्णय लिया है। जिसमें सभी आईटीआई प्रशिक्षितों (400 व्यक्तियों) के अलावा उन सभी को शामिल किया जाए जो लकड़ी की नक्काशी कला/पेशे (200 परिवार) से जुड़े हों। जहां उन्हें ओडीओपी योजनाओं के बारे में बताया जाएगा, साथ ही उसके लाभ और उन्हें ऋण के लिए बैंकों के साथ उनकी टाई कराया जाएगा।
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वीरेंद्र