33.50 करोड़ की योजना पर शासन की मुहर
शहर में विस्तारित होगी 76 किलोमीटर पाइपलाइन
स्थापित होंगे सात नए ट्यूबवेल व आठ ओवरहेड टैंक
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। शहर में पेयजल के लिए नगरपालिका व जल निगम ने पूरा खाका खींच दिया है। योजना में 33.50 करोड़ के प्रस्ताव पर शासन की मुहर भी लग गई है। अमृत योजना में इस प्रस्ताव से कार्य कराए जाएंगे। इसके तहत शहर में पाइपलाइन विस्तारीकरण व नए ट्यूबवेल व ओवरहेड टैंक का निर्माण होगा। योजना को धरातल पर उतारने के लिए शासन की वित्तीय स्वीकृति का इंतजार जल निगम कर रहा है।
शहर में अब तक महज 10 हजार घरों तक जलकल का पानी पहुंचता है। जबकि आंकड़ों में यहां 17 हजार आवास हैं। इन समस्या से निजात के लिए शहर को शासन ने अमृत योजना में शामिल किया था। इस योजना के तहत पार्क निर्माण का भी कार्य होना है, मगर पेयजल के लिए पालिका ने कार्यदायी संस्था जल निगम के माध्यम से शहरी क्षेत्र का सर्वे कराकर 33.50 करोड़ का प्रस्ताव भेजा था, जिस पर शासन ने अब मुहर लगा दी है। प्रस्ताव के मुताबिक शहर में तकरीबन 76 किमी पाइपलाइन विस्तारित होगी, जिससे 5604 घरों में नए कनेक्शन दिए जाएंगे। इसके अलावा पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आठ नए ट्यूबवेल व सात ओवरहेड टैंक का निर्माण किया जाना है। योजना के इस प्रस्ताव पर शासन की मुहर लगने के बाद वित्तीय स्वीकृति के लिए फाइल भेजी गई है। यूं तो शहर को शुद्ध पानी की जरूरत भी जलकल अब तक पूरी नहीं कर पा रहा है। अब इस नए प्रस्ताव के बाद सभी घरों तक पानी पहुंचाने की मंशा कामयाब होगी। खबर है कि प्रस्ताव पर मुहर लगने के बाद शहरी क्षेत्र के विभिन्न वार्डों में जल निगम की टीम उन स्थानों का चयन करने में जुटी है, जहां अब तक पाइपलाइन नहीं पहुंची है। जल निगम के अवर अभियंता एसए सिंह कहते हैं कि प्रस्ताव पर प्रथम चरण में 25 किमी की स्वीकृति मिल गई है। इसके तहत सर्वे कार्य पूरा कराया जा रहा है। द्वितीय चरण में अन्य कार्य पूरे होंगे। उन स्थानों का भी चयन कर लिया गया है, जहां ट्यूबवेल व ओवरहेड टैंक का निर्माण होना है। शहरी क्षेत्र के हर घर को पानी देने की व्यवस्था जल्द से जल्द पूरी हो जाएगी।
पानी के लिए करोड़ों खर्च, बेपानी हैं जरूरतमंद
ग्राम पंचायत पेयजल योजना का हाल, पाइपलाइन में लिकेज से प्रभावित है पानी आपूर्ति
अमर उजाला ब्यूरो
बनकटी। शुद्ध पानी के लिए जल निगम ने ग्राम पंचायत पेयजल योजना में क्षेत्र के कई गांवों में लाखों रुपये खर्च कर ओवरहेड टैंक का निर्माण कराया। मंशा थी कि ग्रामीणों को पाइपलाइन के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। इसका क्रियान्वयन भी वर्षों पहले किया गया। ग्रामीणों ने पानी के कनेक्शन भी लिए, मगर रखरखाव के अभाव में पाइपलाइन डैमेज हो गई और ओवरहेड टैंकों से आपूर्ति रोक दी गई। नतीजतन, अब यह ओवरहेड टैंक पानीविहीन हैं और लाखों रुपये की परियोजना की हवा निकल गई।
ग्राम पंचायत पेयजल योजना अंतर्गत बनकटी क्षेत्र के देईसांड़, महादेवा, थरौली, सजनाखोर, धौरूखोर आदि गांवों में बने दर्जनों ओवरहेड टैंक बेमतलब साबित हो रहे हैं। वर्षों पूर्व पाइपलाइन से पानी सप्लाई भी की गई तथा ग्रामीणों ने कनेक्शन भी लिया लेकिन विभागीय उदासीनता व रख-रखाव के अभाव एक-दो को छोड़कर अधिकांश पाइप लिकेज व यांत्रिक दोष से बंद हो गए हैं।
थरौली प्रधान शिव प्रसाद उपाध्याय ने कहा कि गांव में वर्ष 2014-15 में 1.65 करोड़ की लागत से जल निगम ने ओवरहेड टैंक बनाया था। थरौली, बोकनार, दलित बस्ती व कहार टोला आदि गांवों के 200 ग्रामीणों ने कनेक्शन भी लिया, लेकिन आठ माह किसी तरह संचालित होने के बाद जगह-जगह पाइपों में लिकेज के कारण आपूर्ति बंद कर दी गई। तमाम शिकायतों को भी निगम ने अनसुना कर दिया।
पप्पू यादव, छठी राम ने कहा कि कंचनपुर गांव में पाइप की सतह नीचे होने के कारण आज तक एक बूंद पानी नहीं आया। ऐसे में ओवरहेड टैंक का कोई मतलब नहीं है। देईसांड़ निवासी ग्रामीण तुलसी राम, टासु यादव ने बताया कि 2007-08 में में स्थापित ओवरहेड टैंक से पूरे गांव को पानी नहीं मिल सका। जैसे ही इसे शुरू किया गया वैसे ही जगह-जगह पाइप लीक करने लगा, जिससे तत्काल इसे बंद कर देना पड़ा। पगार खास के प्रधान प्रतिनिधि जितेन्द्र यादव, डॉ. आरपी शुक्ला, भरवलिया निवासी गुद्धूनपाल, बलिराम पाल, शिव कुमार पाल ने बताया की खराब पाइप व रख-रखाव के अभाव में लिकेज होने से इसका लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल रहा है जब की रख-रखाव में भी लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं लेकिन जिम्मेदारसुध नहीं ले रहे हैं। अधिशासी अभियंता जल निगम विशेश्वर प्रसाद ने कहा कि सभी ओवरहेड टैंक चालू कराकर ग्राम पंचायतों को सौंप दिए गए हैं। आपूर्ति में बाधा पैदा करने वाले किसी भी मरम्मत कार्य के लिए ग्राम पंचायत में धन आरक्षित है। लेकिन कहीं ऐसा हो नहीं रहा है। जल्द ही बैठक बुलाकर यह बता दिया जाएगा कि प्रधान कनेक्शनधारियों से वसूली कर मरम्मत कार्य कराए। धन कम होने पर 13वें व 14वें राज्य वित्त से भी व्यय किया जा सकता है।