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शहीदों की याद में 11 को मुंडेरवा में जुटेंगे किसान

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शहीदों की याद में 11 को मुंडेरवा में जुटेंगे किसान
शहीद किसान मेले की तैयारियों का खाका खींचा
अमर उजाला ब्यूरो
मुंडेरवा। शहीद किसान मेले की तैयारियां शुरू हो गईं हैं। गन्ना मूल्य वृद्धि और भुगतान के लिए हुए आंदोलन में 11 दिसंबर 2002 को पुलिस के साथ झड़प में तीन किसान शहीद हो गए थे। शहीदों की याद में भाकियू की ओर से हर वर्ष शहीद किसान मेले का आयोजन किया जाता है।
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गन्ना मूल्य बढ़ोत्तरी, बकाया मूल्य भुगतान, मुंडेरवा शुगर मिल घाटे में चलने से प्रदेश सरकार ने 1998 में बंद कर दी। तभी से यहां की चिमनी में धुआं नहीं निकला। राज्य चीनी निगम लिमिटेड ने इस औद्योगिक इकाई को लगातार घाटे के कारण बंद करना बताया। क्षेत्र के किसानों ने गन्ना (नकदी फसल) बोना कम कर दिया और कस्बे के व्यापारी जीविकोपार्जन के लिए दूसरी जगह चले गए। वर्ष 2002 के दिसंबर पहले सप्ताह में भारतीय किसान यूनियन की ओर से मिल चालू कराए जाने के लिए आंदोलन शुरू हो गए। गेट के पास शामियाने के नीचे दिवान चन्द्र चौधरी (वर्तमान में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष) के नेतृत्व में मिल को चलाने, गन्ना मूल्य 100 रुपये प्रति क्विंटल करने तथा बकाया गन्ना मूल्य भुगतान के लिए धरना शुरू हो गया। 10 दिसंबर को भाकियू और प्रशासन आमने-सामने हो गए। दिवान चन्द्र चौधरी सहित 60 लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। 11 दिसंबर को आंदोलन और उग्र हो गया। पुलिस फायरिंग में मुंडेरवा थाना क्षेत्र के जगदीशपुर मझरिया के बद्री प्रसाद चौधरी, मेहड़ापुरवा के धर्मराज और संतकबीरनगर जिले के चगेरा मगेरा गांव के तिलकराज चौधरी की मौत हो गई, जिससे मुंडेरवा सुर्खियों में आ गया। वर्ष 2003 में इन तीनों किसानों की प्रतिमाओं को स्मारक के तौर पर चीनी मिल तिराहे पर स्थापित किया गया। बृहस्पतिवार को तैयारियों की बाबत भाकियू नेता दिवान चन्द्र चौधरी ने बताया कि 11 दिसंबर को शहीद किसान मेले की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। किसान मेले के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश सिंह रहेंगे। इस बार की प्रमुख मांग राष्ट्रीय किसान आयोग नीति (स्वामीनाथन) लागू करना, बकाया गन्ना भुगतान और धान खरीद प्रमुख होगा। वहीं, किसान मेले की सुरक्षा पुख्ता करने के लिए पुलिस प्रशासन अभी से सतर्क है। एसओ मुंडेरवा कन्हई प्रसाद ने बताया कि किसान मेले के लिए अतिरिक्त फोर्स की मांग की गई है।
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