बस्ती। कार्तिक पूर्णिमा पर जिले भर के विभिन्न नदियों पर श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। इस दौरान परंपरा के अनुसार श्रद्धालुओं ने अन्न व गोदान किया। विभिन्न स्थलों पर आयोजित मेला में लोगों ने जरूरत के सामानों की खरीदारी की तो बच्चों ने मेले में मनोरंजन किया।
कुदरहा प्रतिनिधि के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर शुक्रवार को सरयू नदी के नौरहनी घाट पर श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। पवित्र स्नान के बाद लोगों ने अन्न और गोदान कर पुण्य अर्जित किया। यहां आयोजित मेले में जमकर खरीददारी की। नदी पर भोर में तीन बजे से ही श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हुआ, जो शाम तक चलता रहा। जगह-जगह महिलाओं ने मंगल गीत के साथ सरयू माता को कढ़ाई चढ़ाई और पूड़ी हलुवा का प्रसाद वितरित किया। सिकंदरपुर के जगदंबा पांडेय ने पहले की तरह अखंड रामायण का पाठ कराया और भंडारा आयोजित किया। तट पर लगे मेले में महिलाओं ने जहां सिंगार प्रशासन की खरीदारी की वहीं श्रद्धालुओं ने खेती बाड़ी से जुड़े यंत्र खरीदे। इस मौके पर पूर्व प्रमुख के प्रतिनिधि आसमान सिंह, भोला तिवारी, राजू पांडेय, पिंकू पाल, बबलू तिवारी, विनय उपाध्याय, शशिधर तिवारी, पंकज पांडेय सहित सैकड़ों लोग मेले में शामिल हुए।बनकटी प्रतिनिधि के अनुसार पूर्णमासी के दिन हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र सरयू के विभिन्न घाटों पर डुबकी लगाई। यहां श्रद्धालु गो पूजन, दान-पुण्य व कथा सुनकर पुण्य के सहभागी बने। पवित्र सरयू के नौरहनी, मयंदी घाट पर सुबह से ही स्नानार्थियों का तांता लग गया। क्षेत्र के बनकटी, महादेवा, लालगंज, देईसाड़, पक्का बाजार, बरहुआ मुंडेरवा, लालगंज आदि क्षेत्रों से यहां जुटे।
डॉ. श्रीरामाचार्य ने बताया कि हिंदू धर्म की संस्कृति में कार्तिक मास नियम, संयम का महीना है। पूर्णिमा के मौके पर स्नान का विशेष महत्व है तथा आज के दिन मिल-जुल कर प्रसाद ग्रहण करने से समरसता का भाव पैदा होता है। त्रेता युग में भगवान श्रीराम अवध क्षेत्र के जंगल में भ्रमण करने आए और कुछ दिन सरयू नदी के किनारे वास किया। स्कंद पुराण में इसकी महत्ता का उल्लेख मिलता है कलवारी प्रतिनिधि के अनुसार पवित्र सरयू नदी के माझाखुर्द घाट पर क्षेत्र के गांवो से हजारों श्रद्धालुओं ने डुबकी लगायी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब देव पूजन में प्रथम स्थान के लिए कार्तिकेय की गणेश से प्रतियोगिता हुई जिसमें वे हार गये। क्रोधित होकर कार्तिकेय तप करने चले गये उस दौरान उन्होने श्राप दिया था कि यदि कोई पुरूष या महिला उनके पास जाएगी तो उसे नरक भोगना पड़ेगा। भगवान शिव व माता पार्वती के मनाने पर उन्होंने कहा था कि वर्ष में एक दिन सिर्फ कार्तिक पूर्णिमा को ही मिल सकते है। तभी से कार्तिक पूर्णिमा पर उन्हें प्रसन्न करने के लिए लोग स्नान, दान इत्यदि करते है। क्षेत्र के खखोड़ा, दौलतचक, फेटवा, गौसपुर, कलवारी, अगौना, वैष्णोपुर, मालपुर, भोयर, बेनीपुर, माझाकला, गोड़ियाजोत, धोबहट, माझाखुर्द, रसोइया, लक्षिमनपुर, गुलहरिया, भैंसहटी, चकदहा, तुरकौलिया के हजारो की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने नदी में डुबकी लगाकर दान दिया। महिला श्रद्धालुओं ने मां सरयू को पूड़ी व लप्सी चढ़ाने के साथ गौ दान भी किया। दुबौलिया प्रतिनिधि के अनुसार ब्लाक क्षेत्र के शेरवा घाट स्थिति सरयू नदी के पावन तट पर मेले का आयोजन हुआ। सुबह से ही पहुंची श्रद्धालुओं की भीड़ ने सरयू में डुबकी लगाकर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया।
कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी
विक्रमजोत। सनातन धर्म में कार्तिक पूर्णिमा की बड़ी महानता है। इस तिथि को श्रद्धालु सरयू नदी में स्नान कर उगते सूर्य की उपासना करते हैं। मान्यता के अनुसार छावनी क्षेत्र में सरयू नदी के किनारे बने आधा दर्जन घाटों पर कार्तिक पूर्णिमा के दिन श्रद्धालुओं ने स्नान दान पूजा अर्चना करते हैं जिसके लिए जनपद की सीमा लगा हुआ पुल से लेकर बीडी बांध और निर्माणाधीन विक्रमजोत लालपुर बांध पर लगभग दस किमी लम्बे क्षेत्र मे स्थित आधा दर्जन सरयू घाट जिनमे बांदीपुर सरवरपुर काशीपुर गौरिया नैन और 10 नंबर ठोकर प्रमुख है जहां सुबह ही विक्रमजोत ब्लॉक क्षेत्र के सैकड़ों गांव लोगों ने डुबकी लगाई।
टिनिच प्रतिनिधि के अनुसार बाराह क्षेत्र के कुआनों नदी घाट पर श्रद्धालुओं ने स्नान दान किया। सल्टौआ पौराणिक मान्यता के अनुसार पृथ्वी को बचाने के लिए इसी स्थान पर भगवान विष्णु ने अपने बारहवा अवतार शूकर के रूप मे लिया था और थकान दूर करने के लिए यहां स्थिति कुंड मे विश्राम किया था। मान्यता है कि इस कुंड मे स्नान करके भगवान शिव का जलाभिषेक करने से चर्म रोग ठीक होता है।