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एनडी तिवारी ने रखी थी लाइफ लाइन कैली की नींव

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एनडी तिवारी ने रखी थी कैली की नींव
वन विहार, स्टेडियम व टीवी टॉवर से जुड़ी हैं पूर्व सीएम की यादें
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी की याद जिले की माटी से भी जुड़ी है। जिस लाइफ लाइन ओपेक चिकित्सालय कैली को आज मेडिकल कॉलेज का दर्जा दिया गया है, उसकी नींव भी इन्हीं की देन है। इसके अलावा वन विहार, स्टेडियम व टीवी टावर की याद भी पूर्व मुख्यमंत्री से जुड़ी है।
पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के निधन की खबर सुनते ही समर्थकों में शोक की लहर है। जिसके साथ एक बार फिर जिले के लिए उनके योगदान की भी यादें ताजा हो गईं। जिले को एक के बाद एक उपलब्धियां मिलीं, जिसको बस्ती की दरकार थी। तत्कालीन वन राज्य मंत्री व भाजपा सांसद जगदम्बिका पाल भी पूर्व सीएम एनडी तिवारी के बेहद करीबी थे। उनकी पहल पर बस्ती के बाहरी इलाके में स्थित वन विभाग के वन संरक्षित क्षेत्र के पार्क के रूप में विकसित करने की सहमति दी। उन दिनों टीवी का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा था जिसे देखते हुए कांग्रेस नेता पाल की पहल पर टीवी सेंटर खोलने तथा आवास विकास कालोनी में टॉवर स्थापना को मंजूरी दी थी। जिले के एकमात्र जिला अस्पताल में भीड़ और जरूरी जांच के लिए लोगों को गोरखपुर व लखनऊ की दौड़ लगानी पड़ती थी। उस समय जिले को एक अत्याधुनिक अस्पताल की जरूरत महसूस हो रही थी, जिसे यहां आने पर एनडी तिवारी ने शिद्दत से महसूस किया और उन्होंने कैली गांव में पांच सौ शैय्या ओपेक चिकित्सालय की मंजूरी ही नहीं दी, बल्कि उसकी आधारशिला भी उन्होंने रखी थी। यह अलग बात है कि उनके इस याद को संजोने वालों ने भुला दिया। उनके बेहद करीबी कांग्रेस के प्रदेश स्तरीय नेता देवानंद पांडेय कहते हैं कि स्व. तिवारी का उनसे लगाव था। वे सदैव पिता तुल्य व्यवहार भी करते थे। जिले से उनका जुड़ाव यहां के तमाम विकास योजनाएं गवाह हैं।
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...और जब ढोलक बजाने लगे एनडी तिवारी
परशुरामपुर। पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने नवंबर 2013 में पिकौराभट्ट गांव में बतौर मुख्य अतिथि एक रामलीला कार्यक्रम में शिरकत की थी। पिकौराभट्ट निवासी एनडी तिवारी विचारमंच के तत्कालीन राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकेश शर्मा बताते हैं कि गांव में आयोजित आदर्श रामलीला में तिवारीजी को बुलाया गया था। वे रात में यहां पहुंचे और लगभग दो घंटे अपने समर्थकों व चाहने वालों के बीच रहे। कार्यक्रम से इतने प्रभावित हुए कि स्वयं ढोलक बजाने लगे। हजारों की भीड़ भी झूम उठी तथा लोग खड़े होकर तालियां बजाने लगे। गांव के चतुर्भुजी भट्ट, सुरेश शर्मा, छट्ठी दीन शर्मा बताते है कि वह अविस्मरणीय क्षण था, जो दिल में याद के रूप में बसी है।
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30 जनवरी 2015 को रुकना पड़ा
पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी को 30 जनवरी 2015 को कुशीनगर से लौटते हुए थोड़ी देर के लिए यहां रुकना पड़ा था। क्योंकि रास्ते में जाते समय अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई थी। आनन-फानन उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद स्थिति सामान्य होने पर वे लखनऊ गए।
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