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धरातल पर नहीं उतरा कृषि यंत्रों का बैंक
छलावा साबित हुई मशीनरी बैंक स्थापना
10 लाख तक के कृषि यंत्रों का बैंक बनाने की योजना
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। किसानों की आय बढ़ाकर खेती को रोजगार के मुकाबले खड़ा करने की एक और योजना दम तोड़ने के कगार पर है। इसमें कृषि यंत्रों का बैंक स्थापित करना था, जिसका किसान आवश्यकतानुसार सिर्फ लागत मूल्य अदा करके उपयोग कर सकता था। साल भर पहले से पंजीकरण और समूहों का गठन करके आवेदक इंतजार में टकटकी लगाए बैठे हैं। विभाग में आवेदक सही जानकारी के लिए चक्कर काट रहे हैं।
प्रदेश में सबमिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन योजना चालू के तहत 40 से 80 प्रतिशत अनुदान पर ट्रैक्टर-ट्रॉली, रोटावेटर, थ्रेसर आदि क्रय कराया जाना था। 10 लाख मूल्य तक के यंत्रों पर महज 10 प्रतिशत आवेदन करने वाले समूह, समिति को देना है, बाकी रकम बैंक और कृषि निदेशालय को वहन करना था। स्वयं सहायता समूह, उपभोक्ता समूह, सहकारी समितियां के माध्यम से संचालित करने की योजना थी, जिसे लेकर किसान काफी उत्साहित थे। मगर अब उम्मीद टूटने लगी है। फार्म में मशीनरी बैंक की स्थापना करने वाले समूह के लाभार्थियों की शैक्षिक योग्यता स्नातक स्तर तक होनी चाहिए। वहीं, कृषि एवं संबंधित क्षेत्र के स्नातक को वरीयता योजना में मिलेगी। लाभार्थी की आयु 50 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। कृषि उपनिदेशक के अनुसार इसमें शासन और निदेशालय स्तर से दिशा निर्देश का इंतजार किया जा रहा है। मंडल स्तर से सारी प्रक्रिया पूरी करके शासन को मंजूरी के लिए भेज दी गई है।
लघु सीमांत किसानों के समूह की पात्रता
फार्म मशीनरी बैंक की स्थापना के लिए स्वयं सहायता समूह, उपभोक्ता समूह, सहकारी समितियां, कृषि उत्पादन संघ व उद्यमी के अलावा कम से कम आठ कृषकों वाले समूह पात्र हैं। इनमें 30 प्रतिशत महिला किसान की भागीदारी है। वहीं, 16 प्रतिशत अनुसूचित जाति, 08 फीसदी अनुसूचित जनजाति के शामिल होने हैं।
ट्रैक्टर सहित अन्य उपकरण मिलेंगे
प्रस्तावित कृषि यंत्रों में ट्रैक्टर, रोटावेटर, थ्रैसर, सीडड्रिल, पावर ट्रिलर, जीरोट्रिल सीडड्रिल, डिस्कबंड फार्मर, पावर स्प्रेयर, नैपसेक स्पेयर, सिंचाई पाइप, पंपसेट, सीड ट्रीटिंग ड्रम आदि यंत्र फार्म मशीनरी बैंक को दिलाए जाएंगे। फार्म मशीनरी बैंक की स्थापना के लिए 80 फीसदी अनुदान मिलेगा। वहीं, 10 प्रतिशत लागत संबंधित से ऋण के रूप में मिलेगी। जबकि 10 प्रतिशत संबंधित लाभार्थी समूह को खुद लगानी होगी। क्रय की गई मशीनों के रखरखाव व आरटीओ के पंजीयन तथा बीमा आदि पर आने वाले खर्च की व्यवस्था लाभार्थी समूह को स्वयं करनी होगी।