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एक बेड पर दो-दो बच्चे

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बस्ती। मौसम की मार ने किलकारियों पर हमला बोल दिया है। गर्मी के तीखे तेवर ने जहां जन जीवन प्रभावित कर दिया है वहीं जिला अस्पताल का चिल्ड्रेन वार्ड बीमार बच्चों से खचाखच है। यहां एक-एक बेड पर दो-दो बीमार बच्चों को भर्ती किया गया है। वार्ड में सर्वाधिक बीमार डायरिया, लू, उल्टी-दस्त व वायरल फीवर के हैं। यहां 45 बेड पर साठ मरीज बुुधवार को भर्ती थे। तीमारदार संक्रमण को लेकर सहमे हुए हैं, मगर डॉक्टर कहते हैं कि इलाज की जरूरत के चलते ऐसा किया गया है। तीमारदारों का आरोप यह भी है कि डाक्टर अधिकांश दवाएं बाहर से ही लिख रहे हैं।
कलवारी के मोहम्मद आलम अपनी भांजी को भर्ती कराए हैं। कहते हैं कि व्यवस्था तो ठीक है, मगर डॉक्टर बाहरी दवाएं लिख रहे हैं। गरीबों के लिए सरकार ने अस्पताल में सभी सुविधाएं व दवाओं का इंतजाम कर रखा है, मगर यहां जिम्मेदार मनमाफिक अस्पताल चला रहे हैं। तीमारदार सोना सिंह कहती हैं कि सब कुछ व्यवस्थित है, मगर स्वच्छता पर ध्यान दिया जाना जरूरी है। कहती हैं कि स्टाफ तो इसका प्रयास करता है, मगर यहां भर्ती बच्चों के तीमारदार इसे लेकर जागरूक नहीं है।
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ग्राम देवरिया निवासी ऊषा अपने आठ साल के बच्चे को यहां भर्ती कराया है। कहती हैं कि डॉक्टर संवेदनशून्य हैं। वे अधिकांश दवाएं बाहर से ही लिखते हैं। गरीब कहां से इतना पैसा लाए। अस्पताल में फ्री इलाज का दावा खोखला है।
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मुंडेरवा के रविन्द्र कुमार दो साल की बेटी को भर्ती कराए हैं कहते हैँ कि यहां की व्यवस्था राम भरोसे है। डाक्टरों पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं है। प्रभारी एसआईसी डा. राम प्रकाश कहते हैं कि सभी को निर्देश है कि वे बाहर की दवाएं मरीजों को न लिखें। इस निर्देश का पालन न करने वालों पर कार्रवाई का प्रावधान है, मगर कोई इसकी शिकायत नहीं करता। अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता से ही इसका निदान संभव है।
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