बाढ़ और कटान की मार, कई गांवों पर खतरा
दुश्वारी बरकरार, कटान से खतरे में गांव
खतरे के निशान से 49 सेमी ऊपर है नदी का जल स्तर
कई स्थानों पर पानी का दबाव कम, राहत में जिम्मेदा
अमर उजाला ब्यूरो
दुबौलिया। सरयू नदी ने बुधवार को भी कहर बरपाना जारी रखा। जलस्तर खतरे के निशान 92.730 मीटर से 49 सेंटीमीटर ऊपर यानी अब भी 93.220 मीटर पर बह रही है। नदी का जलस्तर कम होने के बावजूद कटान जारी है। कई गांवों पर अब भी खतरा मंडरा रहा है।
नदी माझा और देवारागंगबरार में कृषि योग्य जमीन लगातार काट रही है। पूरेमोतीराम गांव के पास सामान्य कटान हुई तो अतिसंवेदनशील तटबंध कटरिया-चांदपुर पर स्थिति संभल गई, जिससे बाढ़ खंड के अधिकारियों ने राहत की सांस ली। तटबंध पर दबाव तो बरकरार रहा, लेकिन कटान नहीं हुई। गौरा-सैफाबाद तटबंध पर पारा गांव के पास बने ठोकरों, स्परों और किशुनपुर मोजपुर रिंगबांध, टकटवा रिंगबांध पर जलस्तर घटने से पानी का दबाव कम हुआ। जलस्तर कम होने के बावजूद बाढ़ प्रभावित गांव सुविखा बाबू, टेढ़वा, भूअरिया, सतहा के ग्रामीणों की दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। इधर, बारिश थमने से कटरिया-चांदपुर तटबंध पर बाढ़ खंड ने मरम्मत कार्य तेज कर दिया है।
विधायक हर्रैया ने कही थी कड़ाही चढ़ाने की बात
दुबौलिया। कप्तानगंज विधायक सीए चंद्रप्रकाश शुक्ल ने बुुधवार को कड़ाही चढ़ाने की बात पर कहा कि उन्होंने नहीं विधायक हर्रैया ने ग्रामीणों को बाढ़ की तबाही से बचने के लिए कड़ाही चढ़ाने की बात कही थी। प्रेस को जारी बयान में विधायक शुक्ल ने कहा कि 25 अगस्त को सांसद हरीश द्विवेदी कटरिया चांदपुर बंधे का निरीक्षण करने आए थे, उस दौरान पड़ोसी विधान सभा हर्रैया के विधायक उनके साथ थे। ग्रामीणों से बातचीत में उन्होंने सरयू मइया को कढ़ाई चढ़ाने का सुझाव ग्रामीणों को दे दिया था। मैं यहां की जनता के हर दुख दर्द का भागीदार हूं। मुख्यमंत्री कटरिया-चांदपुर बंधे का निरीक्षण करने आज आ रहे हैं। उनके सामने कटरिया-चांदपुर व गोरा-चांदपुर के क्षतिग्रस्त बांध पर स्परों की पिचिंग कराने, बांध से 90 मीटर लंबाई में रिबेंट लांचिंग व पिचिंग कराने का प्रस्ताव दिया हूं। इस कार्य को कराने को कहूंगा।
खतरे के निशान से ऊपर जलस्तर
अमर उजाला ब्यूरो
विक्रमजोत। माझा क्षेत्र के ग्रामीणों दुश्वारियां कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। एक महीने से लगातार सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर होने के कारण ग्रामीण बाढ़ का दंश झेल रहे हैं। नदी के लगातार कटान से ग्रामीण सहमे हुए हैं।
पिछले तीन सप्ताह से डूबी फसलों के बर्बाद होने का उन्हें डर सताने लगा है। बांध विहीन क्षेत्र में नदी के किनारे बसे गांवों के खेत खलिहान व रास्तों पर बाढ़ का पानी भरा है। जलस्तर कम होने से केशवपुर, बाघानाला, भरथापुर, कल्यानपुर, पड़ाव, चानपुर, सहजौरा और संदलपुर छतौना में नदी ने तेजी से कटान शुरू कर दिया है। इसके चलते खेती योग्य जमीन काट कर नदी आबादी की ओर बढ़ रही है, जिससे आधा दर्जन गांवों के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है। बुधवार को हुई केशवपुर में कटान से जमीन का लगभग चार मीटर चौड़ा व 50 मीटर लम्बा हिस्सा नदी में समा गया। बाघानाला में नदी नव निर्मित अंत्येष्टि स्थल की तरफ बढ़ रही है। भरथापुर गांव को हाइवे से जोडने वाला संपर्क मार्ग कट कर नदी में समा रहा है। कटान से हर दिन नदी में जमीन का एक से दो मीटर हिस्सा समा जा रहा है। मंगलवार को नदी किनारे स्थित शीशम का पेड़ पानी में विलीन हो गया। कल्यानपुर में नदी पूर्वी किनारे पर कटान कर रही है, पड़ाव में सेना की सीमांकित जमीन का लगभग समूचा हिस्सा पानी लील चुकी है। नदी की धारा ने सहजौरा पाठक गांव की ओर रुख किया है। कटान से गांव के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा हे। भरथापुर के ननकू सिंह, जगलाल, भरथलाल का कहना है कि कटान की सूचना रोज बाढ़ खंड के कर्मचारियों को दी जाती, लेकिन कोई दिखाई ही नहीं देता।