जिले में लागू राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में अब भी गरीबों को पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। योजना में कहीं गंवई राजनीति ने तो कहीं लापरवाही के चलते सत्यापन के पेंच में गरीबों का खाद्यान्न उलझ कर रह गया है। कई ऐेसे लोगों को भी पात्र गृहस्थी के कार्ड जारी कर दिए गए हैं, जो अपात्र हैं। हालांकि इन तथ्यों को संज्ञान में लेकर शासन ने इसे शत प्रतिशत ठीक करने के लिए नए सिरे से सत्यापन का निर्देश दिया था, मगर यह निर्देश कागजों तक ही रह गया। छिटपुट को छोड़ जिले के किसी भी ग्राम पंचायत से रिपोर्ट नहीं आई है। इसे लेकर जहां प्रशासन के होश उड़े हैं वहीं शासन में भी बेचैनी है। इसी के नाते प्रदेश के मुख्य सचिव ने वरीयता पर सत्यापन करने का आदेश जारी कर दिया है।
जिले में एक जनवरी 2016 को एनएफएसए लागू हो गयी। इसके बाद गांव-गांव पात्रों के कार्ड बनाने का सिलसिला शुरू हुआ। प्रथम चरण में कार्य पूरा हुआ तो पता चला कि तमाम अपात्र इस योजना में शामिल हो गए हैं। फिर इसका सत्यापन हुआ। गांवों में सूची चस्पा कर लोगों को जिला पूर्ति विभाग अथवा तहसील व ब्लॉक पर सूची के बारे में लोगों ने जानकारी मांगी गई, मगर गंवई राजनीति में यह कार्य भी नहीं हो सका। सूची के सत्यापन में जिला पूर्ति विभाग को पसीना छोड़ देना पड़ा, फिर भी सूची त्रुटिहीन नहीं बन सकी।
इन स्थितियों गंभीर शासन के मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने खेद जताते हुए कहा है कि त्रुटिरहित सूची बनाने के लिए घर-घर जाकर सत्यापन किए जाएं। मुख्य सचिव ने कहा है कि शासन के संज्ञान में है कि लेखपाल, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व अन्य ग्राम स्तरीय कर्मियों द्वारा बहिष्कार किया जा रहा है। मुख्य सचिव ने कहा है कि इस कार्य का बहिष्कार न केवल शासन के सर्वोच्च प्राथमिकता के कार्यक्रम में लापरवाही है बल्कि अनुशासनहीनता का परिचायक है। ऐसे में इस कार्य को समय सीमा में पूरा कर दिया जाना अनिवार्य है। इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता पर कठोरतम कार्रवाई का निर्देेश मुख्य सचिव ने संबधित जिलों के आयुक्त व डीएम को दिए हैं।
डीएसओ रमन मिश्र ने कहा कि मुख्य सचिव का आदेश प्राप्त हुआ है। सत्यापन के लिए पूर्व की तय टीम कार्य करेगी। 15 जुलाई तक यह कार्य पूरा कर अपात्रों को सूची से हटा नई सूची शासन को भेज देनी है।
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नीरज