आयुर्वेदिक चिकित्सा को लेकर शासन बेहद गंभीर है। जबकि परिणाम धरातल पर कहीं नजर नहीं आ रहा है। जिले में स्थित यूनानी और आयुर्वेद के कुल 38 अस्पतालों में मात्र 13 डॉक्टर हैं, जबकि 25 को विशेषज्ञ हाथों का इंतजार है। इन अस्पतालों को आज तक सरकारी भवन नसीब नहीं हुआ। ऐसे में इनका संचालन जैसे-तैसे किराए के भवन में हो रहा है। वहीं, दूसरी ओर डॉक्टरों की कमी के चलते इन अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाएं फार्मासिस्ट दे रहे हैं। यही नहीं जहां एक ओर स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एलोपैथ को भारी-भरकम बजट मिलता है वहीं, आयुर्वेदिक और यूनानी अस्पतालों में बजट का भी रोना है।
तीन यूनानी अस्पतालों में एक डॉक्टर
जिले में स्थापित तीन यूनानी अस्पतालों में केवल एक में डॉक्टर की तैनाती है। शेष दोनों अस्पताल ऊपर वाले के भरोसे चल रहे हैं।
कागज में भर्ती की व्यवस्था
आयुर्वेदिक एवं यूनानी अस्पतालों में यूं तो भर्ती की व्यवस्था बनाई गई है, मगर इन अस्पतालों में एक भी मरीज कहीं नजर नहीं आते। वैसे जिला मुख्यालय पर 15 शैय्या दो अस्पताल हैं, जबकि 30 अस्पताल चार शैय्यायुक्त बनाए गए हैं मगर बजट और संसाधनों की कमी के चलते यहां मरीज भर्ती ही नहीं होते।
रुधौली में 50 शैय्या आयुष अस्पताल को मंजूरी
आयुर्वेदिक अस्पतालों को बेहतर करने की दिशा में रुधौली के बखरिया स्थित आयुर्वेदिक केंद्र में 50 शैय्यायुक्त आयुष अस्पताल को शासन ने मंजूरी दी है। इस अस्पताल में आयुर्वेदिक, यूनानी, होम्योपैथिक और योग चिकित्सा सुविधा होगी। अस्पताल निर्माण के लिए सात करोड़ के प्रस्ताव पर शासन ने मुहर लगाई है।
गनेशपुर में योग अस्पताल संचालित
जिला मुख्यालय से सटे गनेशपुर में स्थित राष्ट्रीय यूनानी चिकित्सालय पर योग स्वास्थ्य केंद्र संचालित होने लगा है। यहां योग से बीमारी दूर करने के लिए एक योग डॉक्टर व सहायक की तैनाती की गई है।
बोले अधिकारी
जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. साहबदीन ने कहा कि आयुर्वेदिक अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी शासन के संज्ञान में है। यह सही है कि आयुर्वेदिक अस्पतालों में व्यवस्थागत कमियों के चलते मरीज भर्ती नहीं किए जाते हैं। वैसे अब अस्पतालों को बेहतर ढंग से संचालित करने का प्रयास शुरू हो गया है। रुधौली में 50 शैय्यायुक्त अस्पताल को मंजूरी मिल चुकी है। जबकि गनेशपुर में योग अस्पताल संचालित हो रहा है। डॉक्टरों की कमी से व्यवस्था थोड़ी ढीली जरूर है, मगर सीमित संसाधनों में बेहतर परिणाम देने का प्रयास जारी है। किराए के भवन वाले अस्पतालों को लेकर शासन ने नया निर्देश जारी किया है। अब ऐसे अस्पतालों को निकटस्थ सीएचसी और पीएचसी में स्थानांतरित किया जाएगा।