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अलनीनो तय करेगा सितंबर की बारिश
पूर्वी यूपी में महज 65 प्रतिशत बारिश का अनुमान
मौसम के नए सिस्टम पर निर्भर होगी बरसात
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। मानसून के पहले दो महीनों में औसत से कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। उम्मीद की किरण सिर्फ अलनीनो का मिजाज है। जो हफ्ते भर में सेट होने का अनुमान है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार अभी अलनीनो सुस्त है। यदि पांच सितंबर तक तेवर यूं ही रहा तो पूर्वी यूपी में खरीफ की फसल में उत्पादन 20 से 30 फीसदी घटने के आसार हैं। यदि ऐसा हुआ तो आगामी रबी की फसल पर भी विपरीत असर पड़ सकता है।
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. पद्माकर त्रिपाठी के अनुसार बस्ती और फैजाबाद मंडल में जुलाई में 45 और अगस्त में 63 प्रतिशत बरसात हुई, जो अनुमान से 15-18 फीसदी कम है। इस हिसाब से सितंबर में 95 प्रतिशत बारिश का पूर्वानुमान निर्धारित है लेकिन यह पूरे यूपी के लिए है। पूर्वी यूपी में यह औसत 65 प्रतिशत तक ही माना जा रहा है। मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार पूर्वी यूपी की धरती प्यासी रह सकती है। जिससे धान, गन्ने और अरहर की फसल प्रभावित होगी। डॉ. त्रिपाठी के अनुसार 96 से 104 फीसदी के बीच दीर्घावधि बारिश सामान्य मानी जाती है। जबकि 96 फीसदी से कम को सामान्य से कम और 104 से 110 फीसदी बारिश को सामान्य से ज्यादा बारिश मानी जाती है। जुलाई और अगस्त में सामान्य से कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। उम्मीद है कि सितंबर में यह कसर पूरी हो जाएगी।
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रबी की बुआई हो सकती है प्रभावित
बारिश का अस्त-व्यस्त सिस्टम खरीफ की फसल पर विपरीत असर डालेगा ही, रबी में गेहूं-जौ के अलावा मटर, चना जैसी दलहनी और तीसी-सरसों, अलसी आदि तिलहनी फसल की बुआई प्रभावित हो सकती है। सितंबर से लेकर अक्टूबर के पहले सप्ताह तक खेत में रबी की बुआई लायक नमी नहीं मिलेगी। इससे किसानों को बुआई से पहले मिट्टी की सिंचाई करनी पड़ेेगी।
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अलनीनो की हरकत का असर
स्पैनिश भाषा के शब्द अलनीनो का अर्थ है लिटिल बॉय। जिसका यहां गर्म जलधारा से तात्पर्य है, जो प्रशांत महासागर में पेरू के पास समुद्री तट के गर्म जल से है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार पिछले कुछ सालों से प्रशांत महासागर की सतह का तापमान बढ़ने से समुद्री हवाएं भटक जाती हैं। इसके असर से जहां ज्यादा बारिश होनी हो उन क्षेत्रों में बारिश नहीं होती और जहां नहीं होने के आसार हों वहां मूसलाधार होने लगती है। अलनीनो की वजह से पूर्वी प्रशांत समुद्र में गर्म जल की मोटी परत बन जाती है, जोकि ठंडे पानी के ऊपर एक दीवार की तरह काम करती है। गर्म दीवार के कारण शैवाल की सही मात्रा विकसित नहीं हो पाती।
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