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न बांध बना, न बाढ़ पीडितों का हुआ विस्थापन

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न बांध बना, न पीड़ितों का पुनर्स्थापन
पीड़ितों में गुस्सा, मुआवजे को लेकर चार से भटक रहे किसान
हर साल बाढ़ व कटान की तबाही झेल रहा कल्यानपुर, भरथापुर
सात गांवों के किसानों की बांध में अधिग्रहीत की गई है जमीन
अरुण/राजेश सिंह
विक्रमजोत। ब्लॉक क्षेत्र में हर वर्ष सरयू नदी तबाही मचाती है। जमींदार भूमिहीन हो चुके हैं तो घर वाले बेघर। सरयू के प्रकोप से बचाने के लिए लोलपुर-विक्रमजोत बांध का निर्माण शुरू हुआ। किसानों की जमीन अधिग्रहीत की गई। राजनीतिक और तकनीकी कारणों से बांध बना भी नहीं ऊपर से किसान मुआवजे के लिए भटक रहे हैं।
सरयू नदी की विनाशलीला का दंश इसके किनारे बसे गांव 1971 से ही झेल रहे हैं। प्रशासन की शिथिलता और सरयू नदी के प्रकोप में अब तक लगभग 50 से ज्यादा बसे-बसाए गांव नदी की धारा में विलीन हो चुके हैं। जून से सितंबर तक लोग हर बार बाढ़ के संकट से जूझते हैं। विगत पांच वर्षों में नदी जिस प्रकार से कटान कर जिले की सीमा में लगभग तीन किमी अंदर घुसी है विकास खण्ड में हाईवे सहित दर्जन भर गांवों के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है। विक्रमजोत के कल्यानपुर, भरथापुर, पड़ाव आदि गांव अतिसंवेदनशील हैं। यहां लगभग दो हजार की आबादी की भूमि से सट कर नदी बह रही है। इस बार नदी ने थोड़ी भी कटान की तो ये गांव भी नदी की धारा में विलीन हो जाएंगे। नदी की धारा और आबादी के बीच में न कोई बांध या स्पर है न ही संवेदनशीलता देखते हुए गांवों में बसे लोगों को अन्यत्र बसाने की योजना। प्रशासन ने चार वर्ष पूर्व ही पुनर्स्थापन की योजना बनाई थी लेकिन अभी तक लोग राह ही देख रहे हैं। वहीं, दो साल पहले सहजौरा पाठक गांव का बचा हिस्सा नदी में समा गया। अब बचे तीन गांवों की बारी है। जिन किसानों के पास पूंजी थी, वे दूसरे गांवों में जाकर जमीन खरीद कर अपना आवास बनाकर सुरक्षित हो गए हैं। अन्य लोग खानाबदोश की जिंदगी बिताने के लिए मजबूर हैं।
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बरसात में जगराता करते हैं गांव के लोग
बारिश का मौसम और नदी का बढ़ता जलस्तर हर साल गांवों के हजारों निवासियों की रातों की नींद उड़ा देता है। इस बार भी ग्रामीणों की नींद अभी से उड़ी हुई है। यदि सरयू ने रौद्र रूप दिखाया तो इन गांवों को बचाना बाढ़ खंड व प्रशासन के लिए मुश्किल ही होगा। जानकारों की मानें तो इन गांवों पर संकट हमेशा रहेगा क्योंकि अगर तटबंध बनता भी है तो ये गांव बंधे के भीतर आ जाएंगे। ऐसे में इनका बचना मुश्किल है इन्हें पुनर्स्थापित करना ही एक मात्र विकल्प है। कल्यानपुर गांव निवासी केशवचंद्र पाण्डेय, संजय यादव, हेमंत पांडेय, मंगल यादव, बैजनाथ, दयाशंकर, प्रेम, राजबहादुर शर्मा का कहना है कि अभी तक प्रशासन ने न तो गांव को पुनर्स्थापित करने की दिशा में ही कोई पहल की है और न ही गांव को बचाने के लिये कोई ठोस कदम उठाया गया है। पिछली बाढ़ व कटान में निरीक्षण करने पहुंचे बस्ती के जिला अधिकारी डॉ राजशेखर ने ग्रामीणों से गांव की सुरक्षा व पुनर्स्थापन के संबंध में बात की थी और माकूल व्यवस्था करने की बात भी कही थी। यही नहीं बाढ़ व कटान के तुरंत बाद तटबंध निर्माण क्षति पूर्ति की भी बात की गई थी परंतु लगभग 11 माह बीत चुके हैं और बाढ़ व कटान का दौर फिर से शुरू होने वाला है लेकिन अभी तक न गांव को बाढ़ से बचाने व कटान से सुरक्षित करने की व्यवस्था की गई है और ना ही पुनर्स्थापना की ही कोई बात साफ हो पाई है। ऐसे में गांव के निवासियों में एक डर बना हुआ है। इस संबंध में एसडीएम हर्रैया शिवप्रताप शुक्ल ने बताया कि बांध और स्परों की मरम्मत के लिए बाढ़ विभाग को लिखा गया है। पश्चिमी छोर पर एक किमी बांध बनाया गया है। जमीन का जल्द ही किसानों को मुआवजे की रकम दी जाएगी। गांव के पुनर्स्थापन की योजना शासन में विचाराधीन है। इसके लिए दो हेक्टेयर जमीन की तलाश की जा रही है।

पीड़ित बोले : हर बार दी जाती है झूठी दिलासा
कल्याणपुर निवासी केशवचंद्र पांडेय का कहना है कि चार साल से भरथापुर, कल्याणपुर, सहजौरा पाठक के लोग अस्तित्व को बचाने के लिए बांध की मांग करते आ रहे हैं। सिर्फ दिलासा दी जाती है कि आप लोगों को दूसरे स्थान पर बसाया जाएगा। लेकिन अभी तक कोई भी पहल नहीं की गई।
गौरियानैन निवासी जनार्दन पाल का कहना है की 2014 में लोलपुर-विक्रमजोत बांध उन्हीं के गांव में बनना शुरू हुआ। उनकी 14 बिस्वा जमीन पर भी बांध बना दिया गया। अर्जी लगाया हूं मुआवजा नहीं मिला। मेरे जैसे दर्जनों किसानों को अपने खेत का मुआवजा अब तक नहीं मिल सका।
कल्याणपुर निवासी सुनील कुमार ने बताया कि हमारे गांव को बचाने की कोई पहल नहीं हो रही। बाढ़ के दौरान घरों में तीन फुट तक पानी भर जाता है। जानवरों को लेकर दूसरे गांव रहना पड़ता है। सुरक्षा के लिए बने ठोकर की मरम्मत और राहत के नाम पर करोड़ों रुपये बिचौलिए डकार जा रहे हैं।
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बाढ़ग्रस्त गांवों कीसुरक्षा व राहतकार्य की मुहिम चला रहे भारतीय किसान यूनियन के ब्लॉक अध्यक्ष द्वारकानाथ पांडे का कहना है कि विक्रमजोत लोलपुर बांध के दो किलोमीटर बना बांध की सुरक्षा में लगभग 21 करोड़ से ज्यादा खर्च हो चुके हैं। राहत कार्य के नाम गोलमाल किया गया है।
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