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निडर होकर सपनों को साकार करें, बनें अपराजिता

Fri, 30 Nov 2018 10:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला बस्ती
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अपराजिता कार्यक्रम को संबोधित करते सीओ सिटी आलोक सिंह। - फोटो : अमर उजाला
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बस्ती। आधी आबादी कहीं परंपराओं की बंदिश में जकड़ी है तो कहीं असामाजिक तत्वों से भयभीत, लेकिन अब डरने की जरूरत नहीं। शासन और प्रशासन बेटियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है। महिला सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन 1090 और डायल 100 की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। बेटियों को चाहिए कि वे निडर होकर अपने सपनों को साकार करें, अपराजिता बनें। ये बातें पुलिस क्षेत्राधिकारी आलोक सिंह ने शुक्रवार को बेगम खैर गर्ल्स इंटर कॉलेज में अमर उजाला फाउंडेशन के अभियान अपराजिता के तहत आयोजित पुलिस की पाठशाला में कहीं।
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सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से महिलाओं को भय मुक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इस मकसद को पूरा करने के लिए समाज के हर वर्ग को आगे आना होगा, जिससे कि बेटियां पढ़ें और आगे बढ़ें। अपराजिता अभियान की सराहना करते हुए कहा कि अमर उजाला महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
सीओ ने कहा कि बेटियों को अपने हक की लड़ाई खुद लड़नी होगी। उन्हें आवाज उठाना होगा, निडर बनना होगा। कहा कि स्कूल-कॉलेज जाने वाली बेटियों को असामाजिक तत्वों की बुरी नजर से बचाने के लिए महिला इंस्पेक्टर की अगुवाई में एंटी रोमियो टीम निरंतर अभियान चलाती है। छात्राओं को चाहिए कि वे पुलिस को अपना मित्र समझें और अपनी परेशानी साझा करें। कार्यक्रम की शुरुआत छात्राओं ने अतिथि देवो भव नमो नम: गीत से किया।
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अधिकारों की जानकारी जरूरी: प्रधानाचार्य
- राष्ट्रपति पदक से सम्मानित बेगम खैर गर्ल्स इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य निलोफर उस्मानी ने नारी सशक्तिकरण से जुड़े अभियान अपराजिता की सराहना की। कहा कि महिलाओं को अपने हक और कानून की जानकारी होनी चाहिए। पुलिस की पाठशाला में छात्राओं को महत्वपूर्ण जानकारी मिल रही है। उन्होंने कहा कि बेटियों के प्रति समाज का नजरिया बदल रहा है। अमर उजाला का यह अभियान बेटियों को स्वावलंबी बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

समाज की सोच में बदलाव जरूरी
- इंटर की छात्रा श्वेता त्रिपाठी ने कहा कि अधिकांश परिवारों में बेटी के साथ भेदभाव किया जाता है। बेटों को स्वादिष्ट पकवान मिलता है तो बेटियों को बचा भोजन। पढ़ाई में भी बेटों को प्राथमिकता दी जाती है। समाज की इस सोच में बदलाव जरूरी है।

हौसले से हासिल कर रहीं सफलता
- श्रेया ने कहा कि घर से स्कूल तक बेटियों को पग-पग पर विकट परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। कभी अपने सौतेला व्यवहार करते हैं तो कभी असामाजिक तत्व उनकी परेशानी का सबब बन जाते हैं। ऐसे में मुकाम हासिल करना आसान नहीं होता। फिर भी बेटियां अपने हौसले से सफलता हासिल कर रही हैं।
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कार्यक्रम में आकर बढ़ा हौसला
- शशि ने कहा कि कार्यक्रम में मिली जानकारी से उसका हौसला बढ़ा है। अब रुकना नहीं, आगे बढ़ना है और बढ़ते जाना है। अपराजिता अभियान बेटियों को निडर और आत्मनिर्भर बनने में मददगार होगा। इसकी जितनी भी सराहना की जाए कम है।
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अब माहौल बदल रहा है
- शिक्षक सबीहा खातून ने कहा कि महिलाएं हमेशा से अपने सम्मान की जंग लड़ती रही हैं। अब माहौल बदल रहा है। बेटियां हिम्मत और हौसले से आगे बढ़ रही हैं। परिवार की सोच भी बदली है। बेटियां बड़ी होकर दो घरों की जिम्मेदारी उठाती हैं। उन्हें फैसला लेने का अधिकार मिलना चाहिए।
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