रहनुमाओं के इंतजार में थक गई निगाहें
तुर्कहिया की दलित बस्ती के लोगों को नहीं मिल पाया पीएम आवास
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। देश में आज भी करोड़ों लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। इनके लिए दो वक्त का खाना व तन के लिए कपड़ा ही जुटा पाना बड़ी मुश्किल से होता है। ऐसे में केंद्र सरकार ने 2015 में प्रधानमंत्री आवास योजना की घोषणा की तो लोगों की खुशी का ठिकाना न रहा। आशा जगी कि अब उनके छत के सपनों को सरकार साकार करेगी। लेकिन बस्ती शहर के तुर्कहिया मोहल्ले में लोगों का सपना साकार होता नहीं दिख रहा है।
मोहल्ले की दलित बस्ती में रहने वाले लोगों की आंखें रहनुमाओं के इंतजार में थक सी गई हैं। यहां लगभग 300 की आबादी है, जिनमें कई परिवार तो झुग्गी-झोपड़ी में रहते हैं। आजादी के 70 वर्ष बाद भी गांव तो दूर की बात है, शहरी क्षेत्रों की गलियां व बस्तियों की सूरत नहीं बदली। तुर्कहिया वार्ड में दलित बस्ती की हकीकत यह है कि पूछताछ पर लोग पलट कर ही सवाल करते हैं कि साहब आवास कब मिलेगा। इनके सवाल भी लाजिमी होते हैं। क्योंकि यहां के बाशिंदे झोपड़ी में गुजारा करते हैं। यहां एक झोपड़ी ऐसी भी हैं, जिसमें दो अनाथ बच्चे रहते हैं। इसमें विनोद और गोविंद जिनकी उम्र करीब 14 वर्ष है। दोनों मौजूद नहीं थे, लेकिन पड़ोसियों ने बताया कि इनके पिता की बीमारी की वजह से मौत हो गई। मां की सड़क हादसे में मौत हो चुकी है। किसी तरह दोनों अपना पेट पाल रहे हैं। वार्डवासियों से जब बात की गई तो आशीष ने कहा कि आवास के लिए उन्होंने आवेदन किया है, देखिए कब दिन बहुरते हैं। शिव प्रसाद ने बताया कि उनके परिवार में छह लोग हैं, पिता मोची का काम करते हैं। दिन भर की मेहनत के बाद बमुश्किल दो जून की रोटी का इंतजाम होता है। ऐसे में घर एक सपना है।
आशा देवी से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि एक ही कमरा है, जिसमें पांच लोग किसी तरह गुजर-बसर कर रहे हैं। अनारकली देवी ने कहा कि बर्तन-चौका करके वह अपने साथ परिवार का पेट पाल रहीं हैं, ऐसे में सरकार का ही सहारा है। संजना ने अपना घर दिखाते हुए कहा कि मेरे पति जूतों की मरम्मत का कार्य करते हैं, घर आप देख ही रहे हैं। जाड़ा, गर्मी, बरसात तीनों यहीं पर कटता है। मायाराम ने कहा कि जनप्रतिनिधि सिर्फ चुनाव आने पर दिखते हैं, तरह-तरह के लोक लुभावने वादे भी करते हैं, बाद में सब भूल जाते हैं।
पात्रों को जरूर मिलेंगे आशियाने
प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर जब नगरीय विकास अभिकरण डूडा के पीओ सतीश सिंह से बात की गई तो, उन्होंने कहा कि शासन की मंशा है कि कोई भी पात्र छूटने न पाए। इसी को ध्यान में रखकर जिलाधिकारी के निर्देश में कार्य किया जा रहा है। बताया कि सर्वे कराया जा रहा है, 6161 लोगों का डीपीआर शासन को भेजा जा चुका है।
कैंप लगाकर फार्म भरे गए हैं: विशाल
तुर्कहिया वार्ड से चुने गए सभासद विशाल शुक्ला का कहना है कि दलित बस्ती में कई लोगों का हाल ही में कैंप लगाकर आवास के लिए फॉर्म भरा गया है। कई ने खुद फार्म भरा है। यहां की समस्याएं मुझे मालूम हैं। हर पात्र को आवास दिलाया जाएगा।