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दहेज हत्या में दो को 10 वर्ष कारावास

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दहेज हत्या में दो को 10 वर्ष कारावास
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परशुराम थाना क्षेत्र में अप्रैल 15 की घटना
फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम ने सुनाया फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। अपर सत्र न्यायाधीश त्वरित न्यायालय हर्ष अग्रवाल ने दहेज हत्या के जुर्म में दोषी करार देते हुए पति और सास को 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक पर छह-छह हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। जिसे न अदा करने पर छह माह की अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी जय गोविंद सिंह ने कोर्ट में घटना का विवरण रखा। बताया कि अमेठी जिले के मुसाफिरखाना थाना क्षेत्र के डारीडीहा निवासी राम विहार तिवारी ने बेटी वंदना की शादी परशुरामपुर के केशवपुर गांव में देवनरायण पांडेय के बेटे प्रवेश कुुमार पांडेय से जून 2014 में की थी। दान दहेज भी दिया था। ससुराल के लोग दहेज से संतुष्ट नहीं थे। एक लाख रुपये सोने की चेन की मांग को लेकर पति प्रवेश कुमार, देवर राजेश और सास सुषमा व अर्चना पांडेय प्रताड़ित करते थे। 16 अप्रैल 15 को फोन से सूचना दी कि उसकी बेटी वंदना की तबीयत खराब है। बेटी की ससुराल पहुंचा तो वंदना अंदर कमरे में मृत दशा में मिली। रिपोर्ट के आधार पर दहेज उत्पीड़न व दहेज हत्या का मामला दर्ज होकर चारों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल हुआ। गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर न्यायाधीश ने पति प्रवेश कुमार और सास सुषमा को दोषी मानते हुए उक्त सजा सुनाई। जबकि अर्चना और राजेश को बरी कर दिया।
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आत्महत्या के लिए विवश करने पर सजा
बस्ती। जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयशील पाठक ने क्रूरता के फलस्वरूप आत्म हत्या के लिए विवश करने पर पति समेत परिवार के चार लोगों को पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 15 हजार रुपये अर्थदंड लगाया है। जिसे अदा नहीं करने पर पांच माह अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
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जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) जय सिंह व सहायक शासकीय अधिवक्ता जय गोविंद सिंह ने कोर्ट में घटना का विवरण रखा। बताया कि मुंडेरवा थाना क्षेत्र के सेंदुरिया निवासी रमेश चंद्र ने थाना लालगंज में एक अगस्त 14 को रिपोर्ट दर्ज कराई। कहा कि उसकी बहन इंद्रावती देवी का विवाह वर्ष 2003 में लालगंज थाना क्षेत्र के सर्वनाशी हर्रैया निवासी बेंचू के लड़के दिग्विजय नाथ के साथ की थी। शादी के पांच साल बाद गौना दिया। हैसियत के हिसाब से दान दहेज दिया। पति, सास सावित्री, देवर ध्रुवचंद व उनकी पत्नी किशलावती एक लाख रुपये नकद की मांग को लेकर प्रताड़ित करते थे। जिसकी सूचना मायके देती रहती थी। इंद्रावती से एक बेटा सत्यम व दो बेटियां पैदा हुईं। 31 जुलाई 14 की शाम चार बजे ससुराल के लोग इंद्रावती व उसके तीन बच्चों को जलाकर मार दिया। रिपोर्ट के आधार पर मुकदमा दर्ज होकर दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए दुष्प्रेेरित करने के मामले में आरोप पत्र दाखिल हुआ। अभियोजन के तरफ से वादी सहित आठ गवाहों के बयान हुए। बचाव पक्ष से कहा गया कि मृतका और बच्चे हादसे में जल गए थे। गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर न्यायाधीश ने उपरोक्त बसजा सुनाई।
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