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शहर में बदलाव तो नहीं पर बढ़ रही हैं सुविधाएं

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नहीं बदला शहर का स्वरूप पर बढ़ रहीं सुविधाएं
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मेडिकल कॉलेज के निर्माण को मिली गति, आधुनिक प्रेक्षागृह की मिली सौगात

अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। महर्षि वशिष्ठ की धरती बस्ती पौराणिक काल से खास रही है। इस भूमि के लाल आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने साहित्य के क्षेत्र में अपना परचम लहराया तो 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अमोढ़ा के राजा जालिम सिंह और महारानी कुवंरी तलाश ने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए। स्वतंत्रता आंदोलन के 300 आंदोलनकारियों को पीपल के पेड़ पर फांसी पर लटका दिया गया। ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व के इस जिले के शहर के स्वरूप में कोई खास बदलाव तो नहीं आया, लेकिन सुविधाएं बढ़ी हैं।
पिछले एक साल में यहां मेडिकल कॉलेज के निर्माण को गति मिली है। नीट की परीक्षा के बाद मेडिकल कॉलेज बस्ती का संचालन शुरू हो जाएगा। यहां सौ छात्र एमबीबीएस की पढ़ाई करेंगे। जुलाई से इसका संचालन शुरू हो जाएगा। यहां 27 असिस्टेंट प्रोफेसरों व 30 रेजीडेंट डॉक्टरों की तैनाती कर दी गई है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने पहली अप्रैल से ओपेक चिकित्सालय कैली की ओपीडी को स्वयं संचालित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिले को दूसरी बड़ी सुविधा ऑडिटोरियम की मिली। नौ करोड़ रुपये की लागत से बने आधुनिक प्रेक्षागृह में 400 से अधिक लोगों के बैठने की व्यवस्था है। भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित यह प्रेक्षागृह आम जनता को भी शुल्क पर उपलब्ध हो सकेगा। दो दर्जन से अधिक गांवों को सीधे शहर से जोड़ने वाले पुराने अमहट पुल का निर्माण भी प्रगति पर है। उधर, फुटहिया पर फोरलेन और टू लेन हाइवे क्रासिंग पर अभी जाम से लोगों को मुक्ति नहीं मिली है। ओवरब्रिज खोलने में अभी एक से डेढ़ माह का समय लगेगा।
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उधर, कैली अस्पताल में फिजिशियन और हृदयरोग विशेषज्ञ नहीं होने की खबर 13 नवंबर 2018 को प्रकाशित हुई तो जिला प्रशासन हरकत में आ गया। डीएम डॉ. राजशेखर ने ओपेक कैली के निदेशक और सीएमओ को पत्र लिखकर आख्या तलब की। यह रिपोर्ट शासन को भी गई। समाजसेवी राना दिनेश प्रताप सिंह ने धरना भी दिया। उधर, कलेक्ट्रेट की एक विस्वा 10 धुर जमीन के घपले की खबर अमर उजाला ने प्रकाशित की। 18 नवंबर 2018 को खबर प्रकाशित होते ही जिला प्रशासन हरकत में आ गया। डीएम ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है, जिसमें अपर उप जिलाधिकारी को अध्यक्ष व बंदोबस्त अधिकारी और तहसीलदार को सदस्य बनाया गया है। इस बीच जिले की बंद चीनी मिलों पर सियासत की खबर दो अप्रैल 2019 को प्रमुखता से प्रकाशित की गई। वाल्टरगंज की गोविंद शुगर मिल पर लंबी सियासत शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद मिल श्रमिक आंदोलन पर उतर आए। मिल चालू कराने, श्रमिकों और किसानों के बकाया भुगतान के लिए चार दिन से अनिश्चितकालीन धरना चल रहा है।
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