सात करोड़ रुपये दबाए बैठे हैं सरकारी महकमे
कार्रवाई करने से बच रहा विद्युत निगम
दस हजार से अधिक के बकाए पर काटते हैं कनेक्शन
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। चिराग चले अंधेरा वाली कहावत जिले में चरितार्थ हो रही है। जिनपर राजस्व वसूली की जिम्मेदारी है, वो खुद ही सरकार का बिल के रूप में रुपये दबाए बैठे हैं। बिजली निगम इनकी ओर टकटकी लगाए हुए है।
जिले के 51 सरकारी कार्यालयों ने 7.67 करोड़ रुपये से अधिक की बिजली का उपयोग किया है और इनकी ओर से बकाए धनराशि के भुगतान के लिए कोई कवायद नहीं की जा रही है। इन विभागों को भुगतान के लिए नोटिस भी जारी किया गया है। बड़े बकाएदारों में कलेक्ट्रेट सहित अन्य सरकारी कार्यालय शामिल हैं। विद्युत निगम कार्रवाई के बजाय निर्बाध बिजली आपूर्ति कर रहा है। आम उपभोक्ताओं के लिए नियम है कि 10 हजार रुपये से यदि अधिक का बकाया हैं, तो कनेक्शन काट दे रहे हैं। बकायेदारों में अधिशासी अभियंता नलकूप खंड 22 लाख, मुख्य चिकित्साधिकारी 73 लाख, सीएमएस कैली अस्पताल 49 लाख, सीएमएस जिला अस्पताल 79 लाख, सीएमओ महिला अस्पताल 22 लाख, विकास भवन 17 लाख, पुलिस अधीक्षक एक करोड़ 45 लाख, बीएसएनएल 39 लाख, वेनिटरी हॉस्पिटल दक्षिण दरवाजा 34 हजार, नगर पालिका 24 लाख, उद्यान विभाग 24 लाख, शहीद सत्यवान सिंह स्टेडियम 14 लाख, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग 35 लाख, जिला सेवा योजन अधिकारी एक लाख, अधीक्षण अभियंता सिंचाई विभाग 40 लाख, जिला विद्यालय निरीक्षक सिविल लाइन छह लाख, पॉलिटेक्निक हथियागढ़ एक लाख, बीटीसी ट्रेनिंग सेंटर एक लाख, जीआरएस इंटर कॉलेज तीन लाख, आईटीआई कटरा 19 लाख, एपीएन डिग्री कॉलेज 98 हजार, महिला महाविद्यालय एक लाख, जिला जेल 20 लाख, सब रजिस्ट्रार आफिस एक लाख, सामाजिक वानिकी तीन लाख, वन कार्यालय रौता सात लाख, डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट 66 हजार, कलेक्ट्रेट 89 हजार, सदर तहसील 57 लाख रुपये। इसी तरह अन्य विभागों पर भी विद्युत निगम का बकाया है।
अधिकारी की सुनिए
अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड प्रथम संतोष कुमार ने कहा कि संबंधित विभागों को नोटिस भेज दिया गया है। विद्युत निगम की ओर से राजस्व प्राप्ति के लिए बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं।