बस्ती। बदले मौसम का असर बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। नतीजतन जिला अस्पताल से लेकर निजी अस्पतालों तक बड़ी संख्या में बच्चे उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। जिला का चिकित्सालय के चिल्ड्रेन वार्ड में 44 बच्चों के बेड पर 70 मरीजों का उपचार चल रहा है। और तो और वार्ड में बाहर की दवाएं लिखने का सिलसिला जारी है, मगर जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए हैं।
चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती बच्चों में 35 मरीज तेज बुखार के हैं। इसके अलावा उल्टी दस्त के 15 तथा बीस बच्चे अन्य बीमारियों से ग्रसित हैं। यहां बीमार बच्चों का इलाज अस्पताल के बजाय बाहर की दवाओं से होता है। यह हम नहीं बल्कि मरीज के तीमारदार बताते हैं। ओपीडी में भी यही हाल है। बृहस्पतिवार को ओपीडी में एक डाक्टर तो मरीजों को अस्पताल की पर्ची के साथ घर से लिखकर लाई पर्ची थमा रहा था। यह कार्य डाक्टर स्वयं नहीं बल्कि उसके पास बैठा एक अन्य युवक कर रहा था। चूंकि डाक्टर पर बाहर से दवा व जांच लिखने के आरोपों की जांच चल रही है। इसलिए उसने यह नई व्यवस्था बनाई है।
डॉक्टर बोले
डा. पंकज शुक्ल ने कहा कि मौसम का सर्वाधिक प्रभाव बच्चों पर पड़ता है। इसी कारण मौसम बदलते ही बच्चे उल्टी-दस्त, बुखार से पीड़ित हो जाते हैं। इसके लिए जरूरी है कि उन्हें सुरक्षित किया जाए। बच्चों को धूप में खेलने से रोका जाए, जबकि बांसी व खुले में रखे खाद्य पदार्थ सेवन न करने दें। नौनिहालों को साथ लेकर चलते समय उनके सिर को ढक कर रखें। कहा कि बुखार होने की दशा में उनके शरीर को पानी से पोंछे और तत्काल डाक्टर की सलाह लें। क्योंकि कोई भी बुखार खतरनाक हो सकता है।
बोले एसआईसी
एसआईसी डॉ. एके श्रीवास्तव ने कहा कि बेड की कमी होने के कारण एक बेड पर दो बच्चों को भर्ती किया जा सकता है। क्योंकि सभी का इलाज डॉक्टर की जिम्मेदारी है। रही बाहर से दवा लिखने की बात तो ऐसा किन परिस्थितियों में डॉक्टर ने किया है। इसकी जांच कराई जाएगी। ओपीडी में घर से पर्ची लिखकर लाने वाले डाक्टर की शिकायत संज्ञान में है। उन पर नजर रखी जा रही है।