विक्रमजोत। चकबंदी प्रक्रिया से नाराज विक्रमजोत क्षेत्र के लोगों ने सोमवार को प्रदर्शन किया। चकबंदी प्रक्रिया को लेकर एक महीने से विभागीय अधिकारियों और ग्रामीणों में बातचीत चल रही है। किसानों का आरोप है कि जिनके पास खेत है और खेती कर रहे हैं उनकी नहीं सुनी जा रही है। विभाग में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसे लोगों को चकबंदी समिति का सदस्य बना दिया गया है, जिनके पास खेती की जमीन तक नहीं है।
सोमवार दोपहर करीब 12 बजे आम राय बनाने के लिए कस्बे के प्राथमिक स्कूल में बैठक बुलाई गई थी। इसमें बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। चकबंदी का विरोध कर रहे ग्रामीणों को मनाने पहुंचे सहायक चकबंदी अधिकारी को 65 ग्रामीणों ने चकबंदी न कराने का हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन दिया। आयुक्त बंदोबस्त लखनऊ, डीएम व आयुक्त राजस्व परिषद को भी ज्ञापन भेजा। सहायक चकबंदी अधिकारी अतुल श्रीवास्तव, कानूनगो ओमप्रकाश मिश्रा, थानाध्यक्ष महेंद्र प्रताप चतुर्वेदी, ग्रामप्रधान प्रतिनिधि रामसेवक, पूर्व प्रधान शैलेंद्र सिंह, राकेश सिंह आदि लोग बैठक में मौजूद रहे। गांव के लोग चकबंदी नहीं कराना चाहते हैं। विरोध कर रहे दो लोगों को हिरासत में थाने लाया गया, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। विरोध करने वालों में रियासत अली, अब्दुल मन्नान, सुनील कुमार, पवन, माता प्रसाद, रामधनी, राधेश्याम, रामबुझारत, पीर मोहम्मद, शिवकुमार, राजाराम, उमा प्रसाद, मेवालाल, कमला सिंह, जमील अहमद, रामजीत यादव, मो. उमर, अंग्रेज, रामचंदर, पूर्व प्रधान हृदयराम, रामजग आदि का कहना है कि विक्रमजोत में चकबंदी की कोई आवश्यकता नहीं है। गांव में जनमत के आधार पर चकबंदी का फैसला होना चाहिए। कुछ लोग के व्यक्तिगत स्वार्थ को लेकर गांव पर चकबंदी थोपी जा रही है।
विरोध की सूचना अधिकारियों को दूंगा
इस संबंध में सहायक चकबंदी अधिकारी अतुल श्रीवास्तव का कहना है कि वह आम राय बनाने गए थे। विरोध करने वालों से अपने सामने हस्ताक्षर करने की बात कही। लोग तैयार नहीं हुए। अगर अधिकतर किसान विरोध में हैं तो इसकी सूचना अधिकारियों को भेजेंगे। निर्णय वही करेंगे समिति में पदेन ग्रामप्रधान विजयकुमारी, राजेश, सोनी, शरद तिवारी, श्रीमती लक्ष्मी रामकिशन है। अगर ये किसान नहीं हैं तो मांग के अनुसार समिति में सदस्यों को बदल दिया जाएगा।