थीम सांग में सजा बस्ती का ऐतिहासिक फलसफा
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बस्ती। नगर है यह खास, है नाम इसका बस्ती.... यही थीम सांग है पहले बस्ती महोत्सव का। पौराणिकता से लेकर आजादी की लड़ाई तक की कड़ियों को एक माला में पिरोने की पहल से भी जहां सभी गीत गुनगुनाने लगे वहीं इसके के माध्यम से साहित्य की थाती व वर्तमान स्थितियों को भी गायक ने सुर में पिरोया है।
पहली बार जिले की धरती पर बस्ती महोत्सव का आगाज सोमवार को हुआ। सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने इसका उद्घाटन किया। इसके बाद रंगारंग कार्यक्रमों की शुरूआत हुई। उद्घाटन के बाद सूबे के मुख्यमंत्री को इस महोत्सव का सचित्र थीम सांग सुनाया गया। इसमें शहीद स्थली नगर बाजार के राजा उदय प्रताप नारायण बहादुर सिंह को याद किया गया। सड़क, नदी, मंदिर, मस्जिद व गुरुद्वारा के बीच यहां के लोगों की जीवन को गीत के माध्यम से खूबसूरत मोड़ दिया गया है। जिले से जुड़े गीत संगीत के इस प्रवाह में हिंदी साहित्य समालोचक आचार्य रामचंद्र शुक्ल व सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की बात न हो तो शायद जिले की थाती अधूरी रह जाती, मगर इन महान हस्तियों के साथ मखौड़ा धाम व श्रृंगीनारी को भी गीत के माला में पिरोया गया है। जिला प्रशासन की यह पहल क्या रंग दिखाती है, कितना होगा आम जन पर इसका असर यह तो भविष्य बताएगा। फिलहाल जो लोग यहां से निकले वे बस यही गीत गुनगुना रहे थे कि नगर है ये खास....।