शास्त्री चौक के पास ठेलेवाले कर रहे पालीथीन का प्रयोग।
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बस्ती। प्रदेश में दो अक्तूबर से पॉलिथीन पर प्रतिबंध है। एक सप्ताह पहले लगे पूूर्ण प्रतिबंध के बावजूद बाजारों में इसका प्रयोग किया जा रहा है। हालांकि अब पहले जैसी स्थिति तो नहीं है, मगर छिटपुट दुकानदार अब भी इसका प्रयोग सामान देने में कर रहे हैं। यह अलग बात है कि इस कारोबार से जुड़े दुकानदार अब काम बंद कर चुके हैं, मगर चोरी छिपे डंप माल को खपाने में वे जुटे हैं।
शासन ने पॉलिथीन कैरीबैग पर 15 अगस्त से प्रतिबंध लगाया था। इसके बाद पालिका व प्रशासन ने लगातार अभियान चलाया। इसमें 50 माइक्रान से कम मोटाई वाले पॉलिथीन विक्रेताओं व दुकानदारों से जब्त किया। इसके बाद लगातार कार्रवाई चलती रही, मगर प्रतिबंधित पालीथिन कैरीबैग बाजार के व्यापारी अपना काम करते रहे। इसके बाद द्वितीय चरण में दो अक्तूबर तक पालीथिन के अलावा थर्माकोल से बने गिलास, प्लेट्स, व अन्य सामानों के बिक्री को प्रतिबंधित कर दिया। तमाम प्रचार प्रसार हुआ, मगर प्रतिबंध का असर व्यापकता नहीं पा सका। करीब एक सप्ताह से ऊपर का समय बीत गया है, मगर बाजार में अब भी प्रतिबंधित पॉलिथीन व प्लास्टिक से बने सामानों के अलावा थर्माकोल के ग्लास, कटोरी, चम्मच व अन्य सामानों को खरीदा व बेंचा जा रहा है।
इस व्यापार से जुड़े कारोबारी कहते हैं कि जितना माल डंप है, उसे कहां खपाएं। अब जब इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया है तो केवल छिटपुट ही मांगने पर ही इसे दिया जाता है। अब भी सबसे ज्यादा मांग सब्जी बाजार व ठेला पर फल आदि बेचने वालों की ओर से है।
गांधी नगर में व्यापार से जुड़े कारोबारी इस्माइल कहते हैं कि लंबे समय से इस कारोबार को कर रहे थे, मगर प्रतिबंध के बाद सारा माल बेच कर नये का ऑर्डर नहीं दिया गया। अभी लकड़ी के चम्मच व उड़ीसा के पत्तल के ऑर्डर दिए हैं। तब तक कारोबार करीब-करीब ठप हो गया है। नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी डॉ. मणिभूषण त्रिपाठी ने कहा कि प्लास्टिक व थर्माकोल के सामानों की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध है। इस पर प्रवर्तन की कार्रवाई शुरू करा दी गई है। यदि कोई भी व्यापारी इसका प्रयोग करते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ जुर्माना तो होगा ही दुकान पर ताला भी लगा दिया जाएगा।