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रॉयल्टी का अल्टीमेटम,भड़के भट्ठा मालिक

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रॉयल्टी का अल्टीमेटम, भड़के भट्ठा मालिक
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जिले के 149 भट्ठा मालिकों पर एफआईआर की तैयारी
भट्ठा मालिक बोले उद्योग खत्म करने की साजिश
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। ईंट भट्ठा उद्योग से जुडे़ कारोबारियों और खनन नीति को लेकर प्रदेश सरकार के बीच ठनी रार का मुद्दा मंगलवार को एकाएक गरमा गया। कारण यह कि प्रशासन ने जिले के 149 भट्ठा मालिकों पर एफआईआर और रॉयल्टी का कई गुना जुर्माना लगाने का नोटिस जारी कर दिया। एक सप्ताह के अल्टीमेटम की जानकारी होते ही भट्ठा मालिकों में खलबली मच गई। यद्यपि इनका संगठन अभी नोटिस की प्रति मिलने तक इंतजार कर रहा है लेकिन उसके बाद इस मुद्दे के तूल पकड़ने की आशंका बढ़ गई है।
सदर तहसील के यादव ब्रिक फील्ड के परशुराम यादव, सिंह ब्रिक फील्ड के राघवेंद्र सिंह, जय मां अंबे ईंट उद्योग के प्रोपराइटर रणजीत चौधरी आदि के अनुसार भट्ठा मालिकों को प्रशासन घुड़की दे रहा है, जबकि प्रदेश सरकार पर खुद उनके साथ वादाखिलाफी कर रही है। उक्त मालिकों का कहना है कि भट्ठा उद्योग से जुड़े कारोबारी कहते हैं कि सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ ने सरकार के एक वर्ष पूरा होने पर ईंट उद्योग को रॉयल्टी से छूट देने का आश्वासन दिया था। यहां तक कहा गया कि यदि ईंट का रेट कम कर दें तो रॉयल्टी में छूट दी जाएगी। भट्ठे वालों ने रेट तो कम कर दिया लेकिन रॉयल्टी के लिए जेल भेजने की धमकी दी जा रही है।
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हफ्ते भर का समय
जिन 149 ईंट भट्ठा मालिकों को नोटिस जारी किया गया है उन पर अनुज्ञापन शर्तों का उल्लंघन, नोटिस नजरअंदाज करने के अलावा रॉयल्टी और जीएसटी जमा करने में हीलाहवाली का आरोप है। डीएम डॉ. राजशेखर ने बताया कि 305 ईंट-भट्ठा मालिकों को समाधान योजना के तहत लाया गया था लेकिल 149 ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। न ही प्रदूषण को लेकर पर्यावरण संबंधी अनुमति ली। नियत तिथि तक औपचारिकताएं पूरी नहीं की जातीं तो एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

गड्ढों के रकबा के अनुसार जुर्माना
डीएम डॉ. राजशेखर के अनुसार जीरो टॉलरेंस पॉलिसी का अनुपालन करते हुए भट्ठे पर ईंट के लिए उन गड्ढों की पैमाइश कराई जाएगी, जहां से मिट्टी खोदी गई है। रकबा के हिसाब से उन गड्ढों की पैमाइश करके रॉयल्टी और अन्य जुर्माना तय किया जाएगा। संबंधित के विरुद्ध एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी। ईंट-भट्ठे मिट्टी खनन करके कच्ची ईंट का उत्पादन (पथाई) तो कर रहे हैं लेकिन अग्रिम रॉयल्टी नहीं जमा कि ए। जो संज्ञेय और दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे में नियमानुुसार मिट्टी खनन की रॉयल्टी और कीमत दोनों ईंट-भट्ठा मालिक से वसूल की जा सकती है।
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10 लाख का प्रदूषण का मुद्दा
पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) ने ईंट भट्ठे के मालिकों को प्रदूषण कम करने के उपाय करने का आदेश दिया था। इससे बचने के लिए पश्चिमी यूपी के तमाम जगह जल्द से जल्द जिग-जैग टेक्नॉलजी इस्तेमाल शुरू हो गई। करीब 10 लाख रुपये वाले इस सिस्टम के महंगा होने की दलील दी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कहा कि स्वच्छ टेक्नॉलजी को अपनाना ही होगा।
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