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गांव का रक्षक स्पर नदी में समाया

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गांव का रक्षक स्पर नदी में समाया
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विक्रमजोत/कुदरहा।
अनहोनी शुरू हो ही गई। कल्याणपुर, भरथापुर और सहजौरा गांवों का अस्तित्व अब घाघरा की धार पर निर्भर है। बांधविहीन तीनों गांवों को बचाने वाले तीन स्परों (ठोकर) में एक शुक्रवार की रात नदी में समा गया।
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केंद्रीय जल आयोग अयोध्या कार्यालय के मुताबिक शुक्रवार शाम पांच बजे जलस्तर 92.620 पर था। अनुमान है कि अब जलस्तर घटेगा लेकिन बनबसा व शारदा बैराज से लगातार हजारों क्यूसेक पानी डिस्चार्ज करने से कटान में स्थायी गुंजाइश कम है। गौरियानयन के पास एप्रन बन जाने से घाघरा अब कल्याणपुर, भरथापुर, सहजौरा पाठक, बाघानाला में भयावह बन गई है। शुक्रवार को लखनऊ से बाढ़ और बचाव कार्यों कि पड़ताल करने आए बाढ प्रखंड के उच्चाधिकारियों की टीम को लोगों का विरोध झेलना पड़ा। राजनीतिक गतिरोध के कारण उक्त गांवों में बांध नहीं बन पाया था। वे लोग बोल्डर गिराये जाने कि मांग पर अड़े हैं। गांव की सुरक्षा के लिए पुराने तीन ठोकरों र्को इंट कंकड़ भरे बोरे डालकर मरम्मत कर काम चलाया जा रहा है। जबकि उसमें से भरथापुर गांव के सामने बंधे के एक महत्वपूर्ण ठोकर का बड़ा हिस्सा नदी की धारा में बह गया। कल्याणपुर विद्यालय भवन के बचाव कार्य में लगे मजदूरों को बाढ़ विभाग के मौके पर मौजूद जेई ने आनन-फानन क्षतिग्रस्त स्पर की मरम्मत में लगाया। लगभग 50 मीटर के अंतराल पर बने स्परों की बीच की मिट्टी को नदी कटान कर बहा ले जा रही है। बाढ़ विभाग के सहायक अभियंता फूलचन्द्र सिंह का कहना है कि घाघरा बिना बांध वाली जमीन में तेजी से कटान कर रही है। कटान की रोकथाम असंभव है। अगर पुराने ठोकरों को बोल्डर से मजबूत न किया गया तो स्पर को बचाना मुश्किल है। कल्याणपुर को दोनों तरफ से नदी घेरती है। गांव के खत्म होने से तय है कि सहजौरा पाठक मैरुंड हो जाएगा। एक तरफ घाघरा तो दूसरी ओर सहायक टेढ़ी नदी के पानी ने गांव को आगोश में ले लिया है। कुदरहा प्रतिनिधि के मुताबिक घाघरा के बढ़ते जलस्तर से कलवारी-रामपुर बंधे के स्परों पर दबाव बढ़ गया है। कई जगह पिचिंग के पत्थर नीचे बैठ गए हैं। इससे बांध प्रभावित हो रहा है। बाढ़ खंड के अफसरों का कहना है कि कराए गए कार्यों से ही नदी की धारा बंधे से तीस मीटर दूर हट गई। धारा मटियरिया गांव के पास बने ठोकर नं. तीन और चार के बीच टकरा रही है। बरसात थमते ही तटबंध की लांचिंग और पिचिंग का काम एक बार फिर शुरू हो गया है। बंधे के स्लोप पर हुए नुकसान की भरपाई के लिए बोरियों में मिट्टी भर कर डाली जा रही है। बाढ़ खंड के अवर अभियंता राघवेंद्र कुमार नायक का कहना है कि बंधे से खतरा टल गया है।
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