जिला अस्पताल में तैनात आर्थो सर्जन डॉक्टर डीके गुप्ता पर मुंडेरवा क्षेत्र के ग्राम भैंसा पांडेय निवासी अरविंद कुमार पांडेय ने लापरवाही का आरोप लगाया है।
अरविंद ने कहा है कि डॉक्टर की लापरवाही के चलते उसके बेटे के पैर में संक्रमण हो गया। डॉक्टर ने जब स्थिति की गंभीरता को समझा तो लखनऊ रेफर कर दिया। लखनऊ में डॉक्टर ने कहा बच्चे की जिंदगी व पैर सलामत चाहते हैं तो तत्काल दिल्ली ले जाइए। अब उसका इलाज दिल्ली चल रहा है। अब भी वह जीवन मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। पीड़ित ने डॉ. डीके गुप्ता की जांच कर कार्रवाई की मांग उठाते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को पत्र लिखा है।
पीड़ित के मुताबिक 15 जून को खेत की सिंचाई करते समय अचानक इंजन पलट गया और उसके पुत्र हिमांशु पांडेय के पैर पर इंजन की ट्राली के नीचे दब गया। ग्रामीण उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे जहां इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया। कर्मचारियों ने डॉ. डीके गुप्ता को दिखाया। जांचोपरांत डॉक्टर ने पैर में फ्रैक्चर होने की बात कही। यह भी सुझाया कि यहां ठीक तरह से इलाज संभव नहीं है। ऐसे में क्लीनिक पर लेकर शाम चार बजे पहुंच जाइएगा। उनका सुझाव मानकर घायल पुत्र को लेकर हम लोग क्लीनिक पर पहुंचे, जहां जांच के बाद एक्सरे कराया गया। फिर पैर में प्लास्टर लगाने की बात कही, मेरे यह कहने पर कि कई जगह कटा हुआ है पैर में संक्रमण हो सकता है पर डॉ. गुप्ता ने ड्रेसिंग कराने की बात कह दी। दवा आदि देकर उन्होंने तीन दिन बाद आने को कहा। तीन दिन बाद जब बेटे को लेकर उनकी क्लीनिक पहुंचा तो प्लास्टर काटा गया, लेकिन तब तक पैर में संक्रमण हो चुका था, उन्होंने यह बात बताते हुए तत्काल लखनऊ रेफर कर दिया। पीड़ित ने डॉक्टर के कृत्यों के जांच की मांग मुख्यमंत्री से करते हुए बेटे के इलाज में मदद मांगी है।
डॉ.डीके गुप्ता ने कहा कि मरीज का इलाज मैने किया था। यह तो सही है, मगर क्लीनिक की बात निराधार है। बच्चे का प्लास्टर चढ़ाया गया, चूंकि मैं आर्थो का डॉक्टर हूं। नसों में सूजन था इस कारण उसे प्लास्टर लगाया गया। लापरवाही का आरोप भी गलत है। मैंने आवश्यक दवाएं भी दी थीं।