फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश प्रमोद कुमार गिरि की अदालत ने दहेज हत्या के मामले में जेठ व जेठानी को 10 वर्ष सश्रम कारावास व प्रत्येक को 9 -9 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न अदा करने पर एक वर्ष सात माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।
शासकीय अधिवक्ता ने कोर्ट में घटना का विवरण रखा। कहा कि गोंडा जिले के नवाबगंज थाना क्षेत्र के मीरपुर युसुफ गांव निवासी हबीब खां ने कप्तानगंज थाने में तहरीर देकर कहा कि उसने बेटी शबनम का निकाह छह वर्ष पहले शाह आलम के साथ किया था। उसके कोई संतान पैदा नहीं हुई थी। दामाद शाह आलम व उसका बड़ा भाई आफताब आलम उर्फ पप्पू व उसकी भाभी सबरूनिशा और दामाद की बहन बिजली कम दहेज मिलने के कारण प्रताड़ित करते थे।
21 मार्च 2013 को कम दहेज के कारण करंट लगाकर शबनम को घर में मार डाला तथा उसे कब्रिस्तान में दफना कर दिया । वादी मुकदमा परिवार के साथ मुंबई रहता था, सूचना मिलने पर आया है। तहरीर के आधार पर पुलिस ने चारों पर केस पंजीकृत कर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया था । शाह आलम न्यायालय में उपस्थित न होने के कारण उसकी पत्रावली अलग कर दी गई। विचारण केवल आफताब आलम व सबरूनिशा के विरुद्ध हुआ। न्यायाधीश ने साक्ष्य के आधार पर आफताब आलम व उसकी पत्नी सबरुनिशा को दहेज हत्या में दोषी मानते हुए 10 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई है ।