बरेली। मांस तस्करी के लिए कुख्यात जुबैर उर्फ पाया ने सात साल में करोड़ों की संपत्ति अर्जित कर ली। पुलिस से बचने के लिए अक्सर वह मुंबई भाग जाया करता था। कोतवाली में बतौर हिस्ट्रीशीटर उसका नाम 358ए दर्ज है। उसका नेटवर्क मुंबई तक फैला है। बुधवार को जिस मकान पर बुलडोजर चलाया गया, उसके भूतल पर जुबैर के गुर्गे मांसाहारी होटल चलाते थे।
जुबैर के खिलाफ बारादरी थाने में 12 और इज्जतनगर थाने में एक मामला दर्ज है। वह बलवा का भी आरोपी है। उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट के चार और गोवध निवारण अधिनियम के तीन मामले दर्ज हैं। सूफी टोला में उसकी चार अन्य संपत्तियां भी हैं, जो अवैध कमाई से बनाई गई हैं। इन पर उसके परिवार के लोग काबिज हैं। बुधवार को कार्रवाई के दौरान उसके परिजनों ने विरोध भी किया, लेकिन पुलिस टीम के आगे उनकी एक न चली। बीडीए के संयुक्त सचिव दीपक कुमार ने बताया कि आरोपी की अन्य संपत्तियों की भी पड़ताल की जा रही है। अवैध पाए जाने पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। संवाद
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पहले दी गई थी ध्वस्तीकरण की चेतावनी
बीडीए के संयुक्त सचिव दीपक कुमार ने बताया कि सूफी टोला निवासी जुबैर ने मानचित्र स्वीकृत कराए बगैर इस मकान का निर्माण कराया था। उसके पास तीन मंजिला इमारत के निर्माण का कोई वैध दस्तावेज नहीं था। इस पर उसको इसके लिए पूर्व में कई नोटिस जारी कर भवन के ध्वस्तीकरण की चेतावनी दी गई थी। सीओ तृतीय पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि जुबैर उर्फ पाया के खिलाफ बारादरी और इज्जतनगर थाने में गोवध निवारण अधिनियम के तीन, जानलेवा हमले के दो समेत कुल 13 मामले दर्ज हैं। उसके खिलाफ गुंडा एक्ट और गैंगस्टर की कार्रवाई भी की जा चुकी है। पुलिस ने उसको छह जून को विकास भवन के पीछे से तमंचे के साथ गिरफ्तार किया था। जमानत पर छूटने के बाद से वह लापता है। पुलिस को उसकी लोकेशन मुंबई में मिली है। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान तीन थानों की पुलिस के साथ एक कंपनी पीएसी भी लगाई गई थी। श्यामगंज से मालियों के पुलिया के बीच मुख्य मार्ग पर उसके चार अन्य मकान भी चिह्नित किए गए हैं।
पाया-चावल बेचकर खान साहब से बन गया जुबैर उर्फ पाया
बरेली। हिस्ट्रीशीटर जुबैर उर्फ पाया ने पांच सालों में ही जुर्म की दुनिया में नाम कमाकर पुराने शहर में दबदबा कायम कर लिया। उसके जिस होटल को ध्वस्त किया गया है, वह उसके पिता जमील खां के नाम से मशहूर हुआ करता था। इसके बाद जुबैर ने सुबह पांच से आठ बजे तक स्पेशल पाया-चावल बेचने की शुरुआत की तो वहां लाइन लगने लगी। इसी बीच वह कई अपराधियों के संपर्क में आया और गो तस्करी में संलिप्त हो गया। साथियों ने उसे जुबैर उर्फ पाया के नाम से मशहूर कर दिया। दबंगई के बल पर वह दूसरों के विवाद में समझौता कराता था और इसके बदले मोटी रकम वसूलता था। होटल पर बुलडोजर चलने के बाद अब लोगों में चर्चा है कि सुबह पांच से आठ बजे तक तस्करी के पाये खिलाए जाते थे। संवाद