बरेली। इन दिनों साइबर ठगों ने लोगों को ठगने के लिए नया तरीका खोज लिया है। वह लोगों को कॉल करके खुद को क्राइम ब्रांच या स्पेशल टीम का सदस्य बताते हुए उनके बेटों, भतीजों के दुष्कर्म या छेड़खानी में फंसने की बात कह रहे हैं। घबराए लोगों से मामला तुरंत निपटाने के नाम पर ऑनलाइन रुपये मांगे जा रहे हैं। पुराना शहर में कई लोगों के पास इस तरह की कॉल्स आई हैं। हालांकि, इनमें से अधिकतर लोगों ने समझदारी से काम लिया और वे ठगी का शिकार होने से बच गए।
भाई के दुष्कर्म में फंसने की खबर से उड़े होश
पुराना शहर निवासी मुनीर का भाई गाजियाबाद में रहकर पढ़ाई करता है। दो दिन पहले मुनीर के पास कॉल आई कि आपका भाई दुष्कर्म के मामले में फंस गया है। हम क्राइम ब्रांच से बोल रहे हैं। उसे छुड़ाना या केस रफादफा कराना चाहते हैं तो पचास हजार रुपये जल्दी से भेज दें, वर्ना मामला हाथ से निकल जाएगा। कॉल कट होने के बाद मुनीर ने भाई को कॉल की तो नंबर नहीं लगा। तब वह और घबरा गए। मां को कॉल की तो उन्होंने बताया कि कुछ देर पहले ही मुनीर से बात हुई है। इधर, ठगों की कॉल लगातार आ रही थी। उधर कुछ ही देर में भाई का नंबर रिसीव हो गया तो मुनीर की जान में जान आई।
भतीजा फंसा बताकर कॉल की तो खुली पोल
सैलानी निवासी मेडिकल स्टोर संचालक आलम के पास व्हाट्सएप कॉल आई। इस पर पुलिस अधिकारी का प्रोफाइल फोटो लगा था। कॉल करने वाले ने बताया कि उनका भतीजा दिल्ली में छेड़खानी के मामले में फंस गया है। उसको बचाना चाहते हैं तो 40 हजार रुपये की व्यवस्था कर जल्दी भेज दो। आलम के मुताबिक उनका कोई भतीजा दिल्ली में नहीं रहता है तो उन्हें अहसास हो गया कि ये साइबर ठग हैं। उन्होंने साथी से अपना वीडियो बनवाया और गिड़गिड़ाने का नाटक किया कि मेरे भतीजे को कुछ मत करना। कुछ देर में ठग ने वह खाता नंबर भी भेज दिया, जिसमें वह रुपये डलवाना चाहता था। आलम ने बात बदली तो ठगों को भी अहसास हो गया कि यहां से कुछ मिलने वाता नहीं है। कुछ तीखी बातों के बाद कॉल कट गई।
इस तरह की कॉल और व्हाट्सएप कॉल से लोगों को सावधान रहना चाहिए। इस तरह किसी को रुपये नहीं भेजने चाहिए। यदि किसी के साथ ऐसी ठगी हुई है तो उनको तत्काल शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
- राहुल भाटी, एसपी सिटी