बरेली। पारंपरिक योग के साथ-साथ आर्टिस्टिक और रिदमिक योग की ओर भी विद्यार्थियों और खिलाड़ियों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। ट्रेडिशनल योग में जहां आसन, प्राणायाम और ध्यान से शरीर को स्वस्थ और संतुलित रखने पर जोर दिया जाता है, वहीं, आर्टिस्टिक योग में इन्हीं आसन को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया जाता है। रिदमिक योग में संगीत की लय पर योग क्रियाओं का अभ्यास किया जाता है, जिससे यह और अधिक रोचक और प्रभावशाली बन जाता है। योग सीखकर वह सिर्फ फिटनेस तक सीमित नहीं है, बल्कि खेल प्रतियोगिताओं में मेडल भी जीत रहे हैं।
- स्कूलों में भी योग का दिया जा रहा प्रशिक्षण
योग विशेषज्ञ रीता सिंह ने बताया कि शहर के कई स्कूलों में अब योग के विभिन्न स्वरूपों को पाठ्यक्रम और सह-शैक्षिक गतिविधियों में शामिल किया जा रहा है। विद्यार्थियों को नियमित रूप से योग का अभ्यास कराया जाता है, साथ ही उन्हें आर्टिस्टिक और रिदमिक योग की तकनीक से भी परिचित कराया जा रहा है। बताया कि आज योग केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। बच्चे आर्टिस्टिक और रिदमिक योग के माध्यम से अपनी प्रतिभा को बेहतर तरीके से प्रस्तुत कर रहे हैं। इससे उनमें आत्मविश्वास और मंच पर प्रदर्शन करने की क्षमता भी विकसित हो रही है।
- प्रतिस्पर्धा के रूप में भी देखा जा रहा है योग
योग का यह स्वरूप अब केवल अभ्यास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रतिस्पर्धात्मक रूप भी लेता जा रहा है। विभिन्न मंचों पर योग प्रदर्शन के आधार पर प्रतिभाओं का मूल्यांकन किया जा रहा है, जिसमें आसनों की शुद्धता, संतुलन, लय और प्रस्तुति को प्रमुख आधार बनाया जाता है। इससे विद्यार्थियों में बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिल रही है।
पदक विजेता खिलाड़ी मानसी ने बताया कि योग के नियमित अभ्यास और कॉलेज में मिले प्रशिक्षण ने उन्हें अपनी प्रतिभा को निखारने का मौका दिया। कहा कि ताइक्वांडो खेलते समय वह चोटिल हो गई थीं। इसके बाद उन्होंने योग का सहारा लिया और कुछ ही दिनों में वह ठीक हो गईं। वह दो बार ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी खेलों (योग) में प्रतिभाग कर चुकी हैं।