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जल संरक्षण के लिए पहल न हुई तो जल्द ही डार्क जोन बन जाएगा शहर

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बरेली। जल संरक्षण के लिए सरकारें तमाम अभियान चला रही हैं लेकिन इसका नतीजा सिफर है। जब तक एक-एक बूंद बचाने के लिए समाज जागरूक नहीं होगा तब तक भावी जलसंकट की आशंका को नकारा नहीं जा सकता। बुधवार को अमर उजाला की ओर से आयोजित वर्ल्ड वाटर वीक 2019 के तहत आयोजित ‘ट्री ऑफ लाइफ’ परिचर्चा में विशेषज्ञों ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे प्रयास जल संरक्षण में बड़ा योगदान कर सकते हैं बशर्ते समाज इसके लिए पहल करे।
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बीडीए के सचिव अमरीश श्रीवास्तव ने कहा कि मुहावरा है कि पैसा पानी की तरह बहाया जाता है जिसका अर्थ है कि पानी का कोई मोल ही नहीं है। यह सोच जल संरक्षण पर प्रश्नचिह्न लगाती है। अगर ‘पैसा पानी की तरह बचाया’ बोला जाए तभी लोग समझेंगे कि पानी अनमोल है। बरेली कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर आलोक खरे ने कहा कि पृथ्वी के 70 प्रतिशत भूभाग पर जल और 30 प्रतिशत भूमि है लेकिन एक प्रतिशत भूगर्भ जल ही पीने योग्य है। इसका काफी हिस्सा भी लोग बरबाद कर देते हैं। इससे भूगर्भ जल स्तर तेजी से गिर रहा है। शहर के रामपुर गार्डन, सुभाषनगर, फरीदपुर, आंवला आदि क्षेत्रों में भूगर्भ जल 350 फुट तक नीचे जा पहुंचा है। भूगर्भ जल स्तर गिरने से नकटिया नदी, शंखा नदी के साथ जिले भर के तालाब, खत्म हो रहे हैं। होम्योपैथी चिकित्सक डॉ. विकास वर्मा ने बताया लोगों को खुद जल संरक्षण के लिए छोटे-छोटे विकल्पों पर ध्यान देना होगा। घरोें में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, पेड़ लगाने, स्प्रिंकलर सिंचाई और तालाबों के जीर्णोद्धार जैसे उपायों से हम इस दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
किसान भी कर सकते हैं जल संरक्षण में योगदान
प्रगतिशील किसान अनिल साहनी ने कहा कि किसान बारिश के पानी संचय करता है। लोग अगर बांज का पेड़ लगाएं तो भूगर्भ जल संरक्षण बढ़ेगा। इससे लुप्त हो रही जैविक प्रजातियां भी संरक्षित होंगी। क्रेडाई यूथ विंग के अभिनव अग्रवाल का कहना था कि क्रेडाई पौधरोपण के बाद अब वाटर हार्वेटिंग सिस्टम लगाने के लिए मूवमेंट चलाने जा रही है। संभावना जताई कि अगर लोगों को वाटर या हाउस टैक्स में सब्सिडी मिले तो वे घरों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम जरूर लगाएंगे। नगर निगम के पर्यावरण अभियंता संजीव प्रधान, डॉ. आलोक श्रीवास्तव, डॉ. राजेश गंगवार, क्रेडाई के जयंत ने भी अपने विचार रखे।
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घरों में भी पानी का जमकर दुरुपयोग
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि घरों में भी पानी का काफी दुरुपयोग होता है। गाड़ी धोने, शॉवर में नहाने, स्विमिंग पूल का पानी बदलने, बेवजह सड़कों को धोने, वाटर आरओ और वॉशिंग मशीन का बेवजह इस्तेमाल, डेयरियों में पानी से गंदगी का साफ करने को पानी बहाया जा रहा है। पेड़ों का कटान होने, डिवाइडर पर पौधे न लगाने से भी पर्यावरण से नमी गायब हो रही है। कहा गया कि स्कूलों में बच्चो को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाए तो बड़े स्तर पर बदलाव लाया जा सकता है।
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