प्रधानमंत्री आवास के लिए रिश्वत मांगे जाने का आरोप लगाते हुए एक मजदूर ने सोमवार दोपहर विकास भवन के गेट पर केरोसिन डालकर आत्मदाह की कोशिश की। कुछ ही दूर कलक्ट्रेट गेट पर खड़े अधिवक्ताओं की निगाह समय रहते उस पर पड़ गई और उसे रोक लिया। पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।
रिश्वत मांगने का आरोप मरौरी ब्लॉक की सचिव प्रियंका गंगवार पर है। गांव गौहनियां के रहने वाले रामपाल का कहना है कि वह पत्नी व चार बच्चों के साथ कच्चे मकान में रहता है। डेढ़ साल से वह प्रधानमंत्री आवास के लिए अफसरों के चक्कर लगा रहा है। आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास की सूची में नाम शामिल करने की बात कहते हुए सचिव प्रियंका गंगवार ने बीस हजार रुपये बतौर सुविधा शुल्क मांगे। जब वह आर्थिक तंगी के चलते रुपये देने में असमर्थ रहा तो उसका नाम सूची से हटा दिया गया।
इसकी शिकायत डीएम, सीडीओ, एसडीएम समेत कई अधिकारियों से की गई। मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी न्याय की गुहार लगाई, लेकिन हर बार फर्जी निस्तारण दर्शाकर अधिकारी बचाव कर ले गए। वह डेढ़ साल से न्याय के लिए भटक रहा है। रामपाल का कहना है कि कहीं से न्याय न मिलने पर उसने आत्मदाह की कोशिश की। अधिवक्ताओं के उसे रोके जाने के बाद कलेक्ट्रेट पर तैनात पुलिस उसे कोतवाली ले गई। रामपाल के खिलाफ चौकी इंचार्ज विजय कुमार की तहरीर पर आत्महत्या की कोशिश की रिपोर्ट लिखी गई है।
मजदूर के आत्मदाह करने की कोशिश का मामला संज्ञान में आया है। लगाए गए आरोप गंभीर हैं। इसकी जांच कराई जाएगी। संबंधित प्रधान और सचिव की अगर गलती पाई गई तो एफआईआर कराई जाएगी।
- राजीव बनकटा, सीडीओ
रामपाल नाम के किसी भी व्यक्ति को मैं नहीं जानती हूं। उसने आवास के नाम पर आवेदन किया या नहीं, यह भी नहीं बता सकती। मेरे ऊपर लगाए गए आरोप गलत हैं।
- प्रियंका गंगवार, सचिव