बरेली। गर्भवती महिलाओं में खून की कमी का सीधा असर बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास पर पड़ता है। खून की ज्यादा कमी होने पर गर्भ में बच्च की मौत तक हो जाती है। प्रसव के समय भी कई जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। इससे कई गंभीर बीमारियां भी हो जाती हैं।
सीएमएस डॉ. अलका शर्मा ने बताया कि रक्ताल्पता (एनीमिया) की शिकार महिलाओं की संख्या में लगातार वृृद्धि हो रही है। राष्ट्रीय सैंपल सर्वे के मुताबिक, प्रदेश में 49.13 फीसदी महिलाएं एनीमिया की शिकार हैं। बरेली में तो स्थिति और भी भयावह है। यहां करीब 50 फीसदी महिलाएं एनीमिया की शिकार हैं। पोषण की कमी, खासकर आयरन युक्त भोजन के अभाव की वजह से महिलाओं में रक्ताल्पता की समस्या होती है। सीएमओ डॉ. विनीत कुमार शुक्ल ने बताया कि आशा और आंगनबाड़ी वर्कर महिलाओं को पोषक आहार और आयरन की गोली के बारे में जानकारी देती हैं। इस अभियान के तहत बच्चों को विटामिन ए की खुराक भी पिलाई जा रही है। कम उम्र में शादी और मां बनने से यह समस्या और भी विकराल हो जाती है।
एनीमिया के लक्षण
त्वचा का सफेद दिखना, जीभ, नाखूनों और पलकों के अंदर सफेदी, कमजोरी और बहुत थकावट, चक्कर आना, बेहोश होना, सांस फूलना, हृदय गति तेज होना, चेहरे और पैरों में सूजन।
एनीमिया होने के कारण
एनीमिया होने का सबसे प्रमुख कारण लौह तत्वों वाली चीजों का उचित मात्रा में सेवन न करना है। मलेरिया, पीलिया आदि बीमारी के बाद शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं। शौच, उलटी, खांसी के साथ खून आना। माहवारी में अधिक मात्रा में खून आना, बार-बार गर्भ धारण करना, पेट के अल्सर से खून आना, ये सब एनीमिया के कारण हो सकते हैं।
उपचार और रोकथाम
खान-पान में लौहयुक्त भोजन का सेवन करना चाहिए। हरी पत्तेदार सब्जी, विटामीन ए और सी युक्त खाद्य पदार्थ, हरा केला, फोलिक एसिड का उपयोग करना चाहिए।