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डीडीपुरम में महिला संक्रमित, हफ्तेभर से किसी ने नहीं ली खबर

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बरेली। कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें उनके हाल पर छोड़ना शुरू कर दिया है। डीडीपुरम में कॉरपोरेट लैब की रिपोर्ट में संक्रमित बताई गई गर्भवती महिला को आइसोलेट तक नहीं कराया गया है। उधर, थाना सीबीगंज के संक्रमित दरोगा के आईटीआर कॉलोनी में अवैध रूप से कब्जाए गए आवास को भी सील नहीं किया गया है। दोनों इलाकों में लोगों में इस वजह से दहशत का माहौल है।
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डीडीपुरम कॉलोनी में एक गर्भवती महिला को 19 जून को कारपोरेट लैब की रिपोर्ट में संक्रमित बताया गया था जिसके बाद उसे कोविड एल-2 अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सात दिन बाद भी अफसरों को महिला के संक्रमित होने की जानकारी नहीं है। इसी वजह से उसका आईवीआरआई की लैब में दोबारा टेस्ट भी नहीं कराया गया है। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के बेखबर रहने से यह इलाका भी कंटेनमेंट जोन नहीं बना न महिला के संपर्क में आने वालों को क्वारंटीन किया गया। कॉलोनी के लोगों ने अब ने स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों से शिकायत की है।
थाना सीबीगंज में दरोगा के संक्रमित निकलने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने इसी तरह की लापरवाही दिखाई है। शुक्रवार को दरोगा के संक्रमित मिलने की खबर आने के बाद आईटीआर कॉलोनी में भी हड़कंप मच गया है। कॉलोनी के लोगों के मुताबिक दरोगा अवैध तरीके से मकान कब्जाकर यहां रह रहा है। उसके घर काम करने वाली महिला दूसरे घरों में भी काम करती है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की सर्विलांस टीम ने यहां कोई पड़ताल नहीं की है। न इलाका हॉटस्पॉट बना है न दरोगा के संपर्क में आए लोगों को ट्रेस किया गया है। लोगों ने प्रशासन से यहां जांच कराने के साथ सैनिटाइजेशन की मांग की है।
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आठ सौ टीमें करेंगी कन्टेनमेंट जोन की निगरानी
कोरोना संक्रमित के स्वस्थ होकर घर लौटने के बाद इलाके में हॉटस्पॉट तो हटाया दिया जाएगा लेकिन शासन ने अब कन्टेनमेंट जोन में इसके बाद भी लगातार 21 दिन निगरानी करने का निर्देश दिया है। यह जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग, पंचायती राज विभाग और राजस्व विभाग को सौंपी गई है। ये टीमें किसी भी और व्यक्ति में संक्रमण के लक्षण दिखने पर तत्काल उसका सैंपल कराएंगे। डीपीआरओ चंद्रिका प्रसाद ने बताया कि निगरानी के लिए पहले ही टीम बना दी गई हैं।
उलझन में अफसर, थर्मल स्क्रीनिंग मशीन
ऐसी जगह लगाएंगे जहां से चोरी न हो
संदिग्ध संक्रमितों की ट्रेसिंग के लिए शासन ने करीब ढाई लाख रुपये की ऑटोमैटिक बॉडी थर्मल स्क्रीनिंग मशीन भेजी है लेकिन चार दिन बाद भी इसे इंस्टॉल नहीं किया जा सका है। दरअसल मशीन को अस्पताल के मेन गेट पर लगाना है ताकि प्रवेश करते ही किसी का भी तापमान पता चल जाए। सौ फॉरेनहाइट से ज्यादा तापमान होते ही अलार्म बज जाएगा। मगर अफसर मशीन को यह तर्क देकर मेन गेट पर नहीं लगा रहे हैं कि वहां से कोई मशीन चुरा सकता है। चार दिनों से मशीन स्टोर में रखी है। सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ल ने जल्द मशीन को तीन सौ बेड अस्पताल में लगाने की बात कही है।
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