सेफ्टी टीम ने टैंक की जांच करने के बाद की थी सफाई की मनाही, फिर भी ऑपरेटर ने कर्मचारियों को नहीं रोका
बरेली/सीबीगंज। बीएल एग्रो की रिफाइनरी में तीन कर्मचारियों की मौत के पीछे प्रारंभिक जांच में बड़ी लापरवाही सामने आई है। सेफ्टी टीम की मनाही के बावजूद एफ्यूलेंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) के 15 फुट गहरे टैंक में इन कर्मचारियों को बिना मास्क और सेफ्टी बेल्ट के ही उतार दिया गया था। इसी वजह से जब टैंक में भरी गैस से उनका दम घुटना शुरू हुआ तो उन्हें बाहर नहीं निकाला जा सका। उल्टे ने उन्हें निकालने घुसे चार और कर्मचारी टैंक में ही बेहोश हो गए।
फैक्टरी प्रबंधन के मुताबिक ईटीपी के इस टैंक में चूने का पानी आता है जिसकी हर महीने सफाई की जाती है। सोमवार को वर्क परमिट लेने के बाद गैस सप्लाई बंद कर टैंक की सफाई की तैयारी शुरू कर दी गई थी। मंगलवार सुबह जांच करने पहुंची सेफ्टी टीम को प्लांट में गैस की गंध महसूस हुई तो वह कर्मचारियों को प्लांट में न उतरने की हिदायत देकर लौट गई। मगर इसके बावजूद ईटीपी के ऑपरेटर नितिन मिश्रा ने नीरज, यासीन और विजय को प्लांट में उतार दिया।
सेफ्टी टीम की हिदायत को इस कदर अनदेखा किया गया कि इन कर्मचारियों को न सेफ्टी बेल्ट लगाने को कहा गया न ही मास्क। टैंक में घुसते ही उनका दम घुटना शुरू हो गया और एक-एक करके बेहोश होने के बाद तीनों टैंक के मलबे में गिर गए। यह नजारा देखकर अफरातफरी मच गई। हड़बड़ी में नितिन मिश्रा, प्रवीण, हेमराज और प्रभात कुमार सिंह भी साथियों को बचाने के लिए बिना मास्क लगाए ही टैंक में उतरे और खुद भी बेहोश होकर गिर गए।
बाद में दूसरे कर्मचारियों ने टैंक में सीढ़ी लगाकर किसी तरह सभी को बाहर निकाला। फौरन ही उन्हें भोजीपुरा के निजी मेडिकल कॉलेज भेजा गया जहां नीरज, यासीन शाह और विजय को मृत घोषित कर दिया गया। बाकी चारों कर्मचारियों की भी हालत गंभीर बताई जा रही है।
ईटीपी मैनेजर सस्पेंड, प्रबंधन ने जांच के लिए बनाई दो टीमें
बीएल एग्रो के प्रबंध निदेशक घनश्याम खंडेलवाल ने कहा कि सेफ्टी टीम ने काम शुरू न करने की हिदायत दी थी। इसके बावजूद कर्मचारी टैंक में उतर गए और यह हादसा हो गया। इस मामले में प्रथमदृष्टया ईटीपी मैनेजर एसएस श्रीवास्तव को दोषी मानते हुए सस्पेंड कर दिया गया है। घटना की जांच के लिए तकनीकी और मानव संसाधन विभाग की दो टीमें गठित की हैं। उनकी रिपोर्ट में अगर मैनेजर की गलती मिली तो उस पर रिपोर्ट भी दर्ज कराई जाएगी।
दहशत में कर्मचारी, मौके पर बिखरे पड़े थे जूते-दस्ताने
टैंक के आसपास के हालात ही बयां कर रहे थे कि हादसा कितना भयावह था। टैंक के अंदर मलबे में कर्मचारियों के हेलमेट और जूते बिखरे पड़े थे। टैंक से बाहर निकालने के बाद कर्मचारियों को जमीन पर लिटाया गया था, जिसके कारण आसपास काला मलबा भी बिखरा पड़ा था। टैंक के बाहर कई जूते-दस्ताने के साथ तमाम सेफ्टी बेल्ट भी पड़ी थीं। इससे जाहिर था कि सेफ्टी बेल्ट पास होने के बावजूद कर्मचारियों ने उनका इस्तेमाल नहीं किया। हादसे के बाद कर्मचारियों के चेहरों पर दहशत का साफ छाप दिखाई दी। वे हादसे के बारे में कुछ बोलने को भी तैयार नहीं हुए। ज्यादातर ने घटना के वक्त अपनी मौजूदगी ईटीपी से दूर बताई। रिफाइनरी के सुरक्षाकर्मियों का भी कहना था कि उन्हें दूसरे प्लांट से बुलाया गया है।
हादसे के बाद भी लापरवाही
रिफाइनरी के टैंक में तीन कर्मचारियों की मौत होने के बावजूद लापरवाही नजर आई। रिफाइनरी में तमाम कर्मचारी बगैर हेलमेट लगाए काम करते दिखे। किसी कर्मचारी ने मास्क भी नहीं लगाया था।
रिफाइनरी गेट पर छह घंटे चला धरना फिर समझौता
बरेली। बीएल एग्रो में कर्मचारियों की मौत की सूचना पर उनके परिवार वाले और गांव के तमाम लोग रिफाइनरी में न घुसने देने पर उसके गेट पर ही धरना देकर बैठ गए और प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। करीब छह घंटे तक धरना प्रदर्शन के बाद अधिकारियों की मौजूदगी में उनका फैक्टरी प्रबंधन से समझौता हो गया।
मृतक कर्मचारियों के परिवार वालों को रिफाइनरी में हादसे की सूचना सुबह करीब 11 बजे मिली। इसके बाद कुछ लोग अस्पताल की ओर दौड़े और कुछ लोग जौहरपुर स्थित रिफाइनरी पहुंच गए। हंगामे की आशंका के कारण कंपनी प्रबंधन ने मुख्य गेट बंद कराकर उन्हें अंदर आने से रोक दिया। चीखपुकार कर रही महिलाएं इस पर गेट पर ही धरना देकर बैठ गईं। साथ आए गांव वालों ने गेट के सामने खड़े होकर रास्ता बंद कर दिया।
भीड़ लगातार बढ़ने लगी तो सीबीगंज पुलिस ने गांव वालों को नेशनल हाईवे पर ही रोकने की कोशिश की लेकिन वे उग्र होने लगे। इस पर पुलिस शांत हो गई। तमाम और लोग आकर रिफाइनरी के गेट पर बैठ गए। शाम करीब पांच बजे फैक्टरी प्रबंधन और मृतकों के परिवार वालों के बीच वार्ता के बाद समझौता हुआ। इस दौरान पुलिस फोर्स भी वहां मौजूद रही।
आठ लाख का चेक, 50 हजार दिए नकद
कंपनी प्रबंधन का कहना है कि प्रत्येक मृतक के आश्रितों को तत्काल आठ लाख रुपये के चेक के साथ 50 हजार रुपये नकद दिए गए हैं। इसके अलावा बीमा राशि के दस लाख रुपये दिलाने और पीएफ के साथ दूसरी सुविधाओं की धनराशि दिलाने में भी सहयोग किया जाएगा। अगर भविष्य में कभी उन्हें किसी तरह की जरूरत होगी तो उनकी मदद की जाएगी।
जांच के बजाए फैक्टरी प्रबंधन से बात करके लौटे सीओ, एडीएम ने हड़काया
बरेली। बीएल एग्रो की रिफाइनरी पर सबसे पहले सीओ द्वितीय आशीष प्रताप सिंह पहुंचे लेकिन जांच करने के बजाय फैक्टरी प्रबंधन के लोगों से घटना की जानकारी लेकर कुछ ही देर में लौट गए। बाद में पहुंचे एडीएम सिटी डॉ. रामदुलारे पांडेय ने जांच के नाम पर पुलिस की इस खानापूरी पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने फौरन फोरेंसिक के अलावा श्रम विभाग, पुलिस के साथ दूसरे विभागों की टीमों को मौके पर बुलाया और उन्हें हर पहलू पर गंभीरता से जांच करने के निर्देश दिए।
एडीएम दोपहर करीब 12 बजे रिफाइनरी पहुंचे तो वहां सबकुछ सामान्य हो चुका था। एसीएम द्वितीय शिल्पा ऐरन ने बताया कि सीओ आशीष प्रताप सिंह जांच करके जा चुके हैं। एडीएम ने बड़ा हादसा होने के बावजूद मौके पर पुलिस के जांच न करने और फोरेंसिक टीम को न बुलाने पर नाराजगी जताई। एडीएम की नाराजगी के बाद सीबीगंज की पुलिस दौड़ी-दौड़ी पहुंची। एडीएम ने इंस्पेक्टर के बारे में पूछा तो पता चला कि सुनील अहलावत को मंगलवार को ही थाने की जिम्मेदारी मिली है और उन्होंने कुछ देर पहले ही ज्वाइन किया है।
एडीएम ने फौरन इंस्पेक्टर और फोरेंसिक टीम को भी बुलवा लिया। इसके बाद श्रम और उद्योग विभाग की टीम को बुलाकर घटनास्थल पर तकनीकी जांच कराने के निर्देश दिए। डीएम मानवेंद्र सिंह को फोन करके घटना की पूरी जानकारी दी। एडीएम ने कहा कि इस मामले में मजिस्ट्रेट से भी जांच कराई जाएगी।
फोरेंसिक टीम ने आधा घंटे तक की पड़ताल
एडीएम के आदेश पर दोपहर करीब दो बजे फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। टीम ने ईटीपी के टैंक की जांच की जिसमें प्लांट की गहराई करीब 15 फुट पाई गई। इसमें करीब साढ़े तीन फुट गहराई तक मलबा था और इसके ऊपर टैंक खाली पड़ा था। टैंक में सीढ़ी लगी हुई थी और आसपास जूते, दस्ताने आदि पड़े हुए थे। फोरेंसिक टीम के साथ ही डॉग स्क्वाड भी मौके पर पहुंचा।
मुआवजे को लेकर भिड़े नीरज के परिजन
सीबीगंज के गांव नदोसी में रहने वाले नीरज के परिवार में उनकी पत्नी प्रियंका यादव और तीन साल का बेटा शिवम है। जब बीएल एग्रो प्रबंधन की ओर से प्रियंका को आर्थिक मदद मिलने की बारी आई तो जेठानी ने इस पर आपत्ति जताई। कहा कि रुपये लेकर वह मायके चली जाएंगी इसलिए यह धनराशि उन्हें मिलनी चाहिए। इस पर गांव के अन्य लोगों ने नाराजगी जताई, जिसके चलते करीब घंटे भर तक परिवार वालों में आपस में ही विवाद होता रहा। मगर बाद में प्रबंधन ने यह धनराशि प्रियंका को ही दी। उनके परिवार में पिता होतेराम और तीन बड़े भाई हैं।
चार भाइयों में सबसे छोटे थे विजय
जौहरपुर के रहने वाले विजय उर्फ गुड्डू के भतीजे अर्जुन ने बताया कि उनकी पत्नी का नाम संध्या है और दो बच्चे हैं। बड़ी बेटी चार साल की है और दो साल का बेटा है। परिवार में अशोक, मंगलसेन और राजू उनसे बड़े तीन भाई हैं। सभी अपना अलग-अलग काम करते हैं। विजय इस फैक्टरी में नौकरी करके अपना परिवार चलाते थे। परिवार वालों ने बताया कि वह सुबह करीब छह बजे घर से काम करने निकले थे।
यासीन की अभी नहीं हुई है शादी
सीबीगंज के गांव गौतारा में रहने वाले मैदान शाह के बेटे यासीन की अभी शादी नहीं हुई है। परिवार में मां नूरजहां के अलावा सलीम, तस्लीम उनसे बड़े भाई हैं और आफताब छोटे हैं। इसके अलावा छह बहने हैं, जिनमें तीन की शादी हो चुकी है। सलीम और तस्लीम की शादी हो चुकी है और अब परिवार वाले उसके लिए रिश्ते की तलाश कर रहे थे।