इसके बाद फिर उसी वाहन का बीमा कराकर और चोरी दिखाकर क्लेम ले लिया जाता था। एक ही ट्रक या कार में कई बार नंबर बदलकर और गिरोह के सदस्य को उसका मालिक बनाकर वसूली का यह खेल चलता रहा। सूत्रों के मुताबिक फाइनेंस कंपनियों के सर्वेयर और आरटीओ के कर्मी व दलाल भी इसमें शामिल थे।
चैटिंग व बातचीत का रिकॉर्ड मिला
एक आरोपी के मोबाइल फोन से आरटीओ दफ्तर के किसी मनोज नाम के शख्स से चैटिंग व बातचीत का रिकॉर्ड भी मिला है। एसटीएफ इंस्पेक्टर दिलीप तिवारी और उनके सहयोगी अशोक गुप्ता काफी समय से इस गिरोह के पीछे लगे थे, जिसमें अब सफलता मिली है।
धंधेबाजों ने हर फन के माहिर शख्स को अपने साथ जोड़ रखा था। जेल भेजा गया मुरादाबाद के जारई गेट निवासी शमी बर्तनों पर नक्काशी का उम्दा कारीगर है। उसे गिरोह ने चेसिस व इंजन नंबर बदलने के लिए साथ रखा था। वह ग्राइंडर से चेसिस नंबर हटाकर दूसरा लगाता था। वहीं इंजन नंबर की पत्ती भी कायदे से हटा दी जाती थी। वसीम और आफताब फाइनेंस कंपनी के दलाल बताए जा रहे हैं।
एसटीएफ लखनऊ के एएसपी अमित कुमार नागर ने बताया कि एसटीएफ काफी समय से इस गिरोह की तलाश में थी। आरोपियों से पूछताछ, सीडीआर व अन्य माध्यमों से काफी जानकारी मिली है। बरेली के परिवहन कार्यालय समेत कई प्रदेशों और शहरों के कई दफ्तरों तक गिरोह का नेटवर्क है, जिसे ध्वस्त किया जाएगा।