अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। फरीदपुर टोल प्लाजा के तार मिर्जापुर जिले के अतरौला टोल प्लाजा से जुड़ रहे हैं। वहां स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने फर्जी सॉफ्टवेयर के जरिये रोजाना 40-50 हजार रुपये घपले का खुलासा किया है। जो कंपनी वहां टोल प्लाजा का संचालन कर रही है, फरीदपुर का टोल प्लाजा भी 15 माह तक उसी के अधीन रह चुका है। ऐसे में यहां भी जांच शुरू कर दी है। हालांकि, प्रारंभिक जांच में कोई गड़बड़ी नहीं मिली है, पर पुराना डाटा खंगाला जा रहा है।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के स्थानीय अधिकारियों ने फरीदपुर टोल प्लाजा की गोपनीय जांच कराई। अधिकारियों ने दो-दिन तक टीम भेज कर रिकॉर्ड दिखवाए और मौके पर तैनात रहकर वहां की निगरानी की। कोई फर्जीवाड़ा तो सामने नहीं आया, पर जांच जारी है। एनएचएआई के अधिकारियों के मुताबिक सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि जिस कंपनी के पास फरीदपुर का टोल था, वह अपना सॉफ्टवेयर और रिकॉर्ड साथ ले गई है। बीते साल पांच दिसंबर को नई कंपनी ने यहां कामकाज संभाला है।
मिर्जापुर में एसटीएफ के खुलासे के बाद यहां भी हर वसूली का ऑडिट कराने के साथ डाटाबेस खंगाला जा रहा है। सिस्टम से ही पर्ची कट रही है, ताकि घपला न हो। फरीदपुर टोल प्लाजा के कंट्रोलर राकेश कुमार ने बताया कि एनएचएआई के अधिकारियों-कर्मचारियों ने छानबीन की है। कोई गड़बड़ी सामने नहीं आई है। कंपनी भी अपने स्तर से सतर्कता बरत रही है। एनएचएआई के परियोजना निदेशक प्रशांत दुबे ने बताया कि जांच अभी खत्म नहीं हुई है। संवाद