नगर निगम ने एलईडी लाइट के टेंडर निरस्त होने की अफवाह भर थी। ये बात कुछ लोगों ने मामला दबाने के लिए यूं ही फैला दी और कुछ अखबारों में खबर भी छपवा दी, लिखा-पढ़ी में ये टेंडर निरस्त नहीं किए गए हैं। बताया जाता है कि कंपनियों से ज्यादा कीमत पर एलईडी स्ट्रीट लाइट खरीद की डील पर पर्दा डालने के लिए ऐसा किया जा रहा है। अगले हफ्ते होने वाली कार्यकारिणी और बोर्ड की बैठक में एलईडी लाइट खरीद डील का मामला गरमाने के आसार हैं।
नगर निगम ने लाइट और उसके उपकरण खरीद के लिए छह करोड़ के बजट का प्रावधान किया है। प्रथम चरण में एक करोड़ की एलईडी लाइटें खरीदने के लिए प्रकाश विभाग ने दिल्ली, गाजियाबाद, मुंबई और बरेली की आठ कंपनियों से एलईडी लाइट खरीदने के लिए डील की थी। कंपनी प्रतिनिधियों ने ट्रायल के दौरान 25, 40 और सौ वाट की एलईडी स्ट्रीट लाइटों की न्यूनतम थोक कीमतें 3850 से लेकर 50 हजार रुपये तक बताई। बाजार में थोक और फुटकार दुकानदार ऐसी स्ट्रीट लाइटों की कीमतें फुटकर रेट से भी कम बता रहे हैं। नगर निगम का प्रकाश विभाग कमीशन के खेल के चलते लंबे समय से स्ट्रीट लाइटों से लेकर बिजली के उपकरण तक मार्केट रेट से ज्यादा कीमतों में खरीदता चला आ रहा है। अमर उजाला ने मामला उठाया था। इस पर नगर निगम के अफसरों ने शासनादेश में एलईडी स्ट्रीट लाइट खरीद के नियमों का हवाला देकर अपना बचाव करने की कोशिश की। जब बात नहीं बनी तो टेंडर निरस्त कर दोबारा टेंडर मांगने की बात चलने लगी। बुधवार को ये अफवाह फैला दी गई कि एलईडी स्ट्रीट लाइट खरीद के टेंडर निरस्त कर दिए गए हैं। हालांकि बाद में टेंडर निरस्त करने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।
‘अभी टेंडर निरस्त नहीं हुए हैं लेकिन ऐसी बात चल रही थी। एलईडी लाइट खरीद के मामले में आचार संहिता खत्म होने के बाद निर्णय होगा।’ डा. आईएस तोमर, मेयर