बरेली। बरेली मुरादाबाद मंडल के उद्यमी, निर्यातक, प्रगतिशील किसानों के साथ संवाद करने के लिए प्रदेश के मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह शनिवार को शहर में मौजूद रहेंगे। साथ ही, उनकी समस्याओं को समाधान कराएंगे। इधर, उद्यमियों ने भी समस्याओं की सूची तैयार कर ली है।
मुख्य सचिव दोपहर दो से पांच बजे तक जीआईसी ऑडिटोरियम में संवाद और समाधान कार्यक्रम में शामिल होंगे। व्यवस्थाओं में कहीं कोई खामी न रहे और रिपोर्ट आदि तैयार करने के लिए जिला प्रशासन की ओर से दिनभर बैठकों का दौर जारी रहा। प्लाईवुड मैन्युफैक्चर्स वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारी भी तैयार हैं।
समस्याओं का पुलिंदा, समाधान के लिए मुख्य सचिव के सामने रखेंगे। पर्यटन, औद्योगिक विकास, भूमि उपलब्धता, एनओसी की अड़चन, सिंगल विंडो सिस्टम के बावजूद अफसरों के चक्कर काटने का मुद्दा रखा जाएगा।
निजी जमीन पर पेड़ों को काटने की मांगेंगे अनुमति
प्लाईवुड एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को जंक्शन रोड स्थित एक होटल में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि प्लाईवुड कारोबार के जरिए रोजगार की अपार संभावना है। पर विभागीय अड़चन, अनुमति के फेर में पड़ने से यह मुमकिन नहीं। विरासत में मिला मकान, दुकान कभी भी बेच सकते हैं, तोड़ भी सकते हैं पर लगाया पेड़ नहीं काट सकते। अगर यही कानून बनते रहे तो भविष्य में प्लाईवुड फैक्टरियां बंद होना तय है।
टैक्स और विकास शुल्क का भी उठाएंगे मुद्दा
उद्यमी धान के निर्यात के साथ नगर निगम की ओर से रोपित पांच गुना टैक्स को कम करने और विकास शुल्क भी सामान्य रखने की मांग मुख्य सचिव के समक्ष रखेंगे। साथ ही उद्योग स्थापना के लिए सहूलियत मांगेंगे। इस दौरान अध्यक्ष अशोक अग्रवाल, दिनेश गोयल, अभिनव अग्रवाल, एसके सिंह, डाॅ. मनीष शर्मा, तनुज भसीन, मयूर धीरवानी, राजेश गुप्ता, उन्मुक्त संभव शील, सलिल बंसल, विमल रेवाडी, आशुतोष शर्मा, अशोक गोयल व अन्य मौजूद रहे।
किसानों की आमदनी बढ़ाने और इंडस्ट्री को कच्चा माल दिलाने पर होगा मंथन
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। किसानों की आमदनी बढ़ाने और प्लाईवुड इंडस्ट्री को पापुलर तथा यूकेलिप्टस की लकड़ी उपलब्ध कराने के नए प्लेटफार्म को बनाने पर मुख्य सचिव के सामने शनिवार को मंथन होगा। उद्यमियों और किसानों को पक्ष सुनने के बाद अधिकारी ऐसा प्लेटफार्म तैयार कराने का तरीका तय करेंगे, जिससे किसानों को लकड़ी की वाजिब कीमत और उद्यमियों की उनकी जरूरत वाली लकड़ी मिल जाए। इंडस्ट्री और प्रगतिशील किसानों के प्रतिनिधि इसे लेकर आपस में मंथन कर चुके हैं।
किसानों की ओर से प्रगतिशील किसान अनिल साहनी मॉडल पेश करेंगे। कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक राजेश कुमार ने बताया कि फर्नीचर इंडस्ट्री और प्लाईवुड इंडस्ट्री के लिए अपार संभावनाएं है लेकिन किसानों को लकड़ी का वाजिब दाम नहीं मिलता। तमाम, किसान लकड़ी को उत्तराखंड में जाकर बेचते हैं। स्थानीय इंडस्ट्री लकड़ी के लिए परेशान होती है। अगर किसानों को यहीं पर उत्तराखंड वाला मूल्य मिल जाए तो किसान लकड़ी को बाहर नहीं भेजेंगे। जरूरत सिर्फ स्थानीय स्तर पर प्लेटफार्म बनाने की है।