बाढ़ खंड ने प्रशासन को अब तक बनाकर नहीं दी बाढ़ नियंत्रण की कार्ययोजना
बरेली। मानसून सीजन 15 जून से शुरू हो गया है लेकिन प्रशासन को बाढ़ के खतरे से निपटने की तैयारियां करने की याद नहीं आई हैै। अब तक बाढ़ से निपटने की कार्ययोजना तक नहीं बनी है जबकि जिले में कई बार बाढ़ से भारी तबाही हो चुकी है। बाढ़ खंड की ओर से अब तक प्रशासन को बाढ़ से बचाव की कार्ययोजना तक बनाकर नहीं दी गई है जबकि जुलाई में बरसात शुरू होने के साथ ही नवाबगंज, बहेड़ी, आंवला और तहसील सदर के सैकड़ों गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराना तय है।
बाढ़ की तैयारियों को हालांकि पिछले महीने 21 मई को विकास भवन में अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी। इसमें रामगंगा, किच्छा, धौरा, पंघेेली, बहुगुल और भाखड़ा नदियों की बाढ़ से होने वाली तबाही को लेकर चर्चा हुई थी। बाढ़ खंड के अफसरों ने बताया था कि जिले में गौंटिया मोहरसिंह और भगवानपुर से रूकमपुर तक दो तटबंध बने हैं। डीएम नितीश कुमार ने बाढ़ से निपटने के लिए सभी तटबंधों का भौतिक सत्यापन करने, बाढ़ग्रस्त इलाकों में बचाव के लिए उपलब्ध नावों का सत्यापन कर गोताखोरों की सूची तैयार करने, राहत साग्रमी के वितरण को राष्ट्रीय आपदा राहत की गाइडलाइंस के तहत टेंडर कराने सहित बाढ़ आने पर जानवरों के लिए चारे की व्यवस्था के लिए दरें निर्धारित करने के निर्देश दिए थे, लेकिन एडीएम वित्त मनोज कुमार पांडेय को अब तक बाढ़ खंड की ओर से इन तैैयारियों को लेकर कोई प्लानिंग नहीं मिली है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि ये रिपोर्ट बन चुकी है। जल्द ही दे दी जाएगी।
बाढ़ से निपटने के लिए विभागों की ये हैं जिम्मेदारियां
- पीडब्ल्यूडी-
संवदेनशील क्षेत्र और तटबंधों तक पहुंचने के लिए एवं राहत सामग्री की आपूर्ति के लिए वैकल्पिक मार्गों का चिह्नित कर उन्हें ठीक कराया जाए। रेलिंग पुलों की मरम्मत के काम भी कराए जाएं।
- नगर विकास विभाग-
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में हैंडपंपों के क्षतिग्रस्त प्लेटफार्म आदि की मरम्मत कराई जाए। साफ पानी की आपूर्ति के साथ ही पुल और सड़कों की मरम्मत सहित अन्य आवश्यक कार्य भी कराए जाएं।
- पंचायतीराज विभाग-
गांवों के आंतरिक और संपर्क मार्गों की मरम्मत कराने के साथ ड्रेनेज और सीवरेज सिस्टम को साफ कराया जाए। पाइप लाइन और स्ट्रीट लाइटों की रिपेयरिंग भी समय से हो।
-राजस्व विभाग-
बाढ़ बचाव के लिए नावों की व्यवस्था कराने के साथ गोताखोर और नाविकों की सूची तैयार करना, ताकि वक्त पर उनकी मदद की जा सके।
-स्वास्थ्य विभाग -
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में दवाईयों का पर्याप्त भंडारण कराने के साथ टीकाकरण आदि की व्यवस्था कराना। बाढ़ चौकियों पर लगाई जाने वाले कर्मचारियों की लिस्ट तैयार करना। पुलिस विभाग को भी इसका रिकार्ड रखना होता है।
प्रशासन के पास बचाव के लिए उपलब्ध हैं ये उपकरण
राजस्व विभाग के पास बाढ़ से बचाव के लिए मेगाफोन, फोल्डेबुल स्ट्रेचर, फर्स्ट एंड किट, सेफ्टी हेलमेट, अग्निशमन यंत्र और वाटर कंटेनर डेढ़-डेढ़ सौ की संख्या में उपलब्ध हैं। इसके अलावा वर्ष 2009 में शासन से 25 रोप लेडर, 10 ड्रेगन सर्च लाइट, आठ एल्यूमिनियम सीढ़ी, 1500 वालंटीयर जैकेट, 30 लाइफ जैकेट, 10 पीए मेगाफोन सहित कई उपकरण तहसीलों को दिए गए थे।
बाढ़ से बचाव के लिए अभी बाढ़ खंड से प्लानिंग नहीं मिली है। उन्हें कई बार निर्देशित किया जा चुका है। उम्मीद है कि इसी हफ्ते बाढ़ की कार्ययोजना मिल जाएगी। - मनोज कुमार पांडेय, एडीएम वित्त