खुटार। जंगल से बाहर निकल रहे वन्यजीव जिले के खुटार इलाके तक पहुंच रहे हैं। पिछले करीब एक माह से खुटार के गांव हिमांचलपुर, छापाबोझी, नरौठा आदि गांवों के आसपास बाघ देखा जा रहा है। इस दौरान बाघ दो गायों, एक नीलगाय और एक बकरी को निवाला बना चुका है। इससे ग्रामीण में दहशत हैं। मगर वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी चुप्पी साधे बैठे हैं। बाघ के डर से किसान खेतों में पीपा बजाकर काम कर रहे हैं। एक बार फिर बाघ गांव नरौठा देवीदास के खेत में देखा गया।
मंगलवार को गांव नरौठा देवीदास निवासी सकरूल्ला अपने खेतों पर जा रहे थे। तभी अचानक वहीं के रहने वाले छेदालाल के गन्ने से बाघ को निकलते देख सकरूल्ला को पसीना आ गया। वह शोर मचाते हुए गांव की ओर भागे। उनकी चीख सुनकर लोग लाठी, डंडे, भाले आदि लेकर खेतों की ओर भागे। भीड़ को देखकर बाघ दोबारा छेदालाल के गन्ने में चला गया। बाघ देखे जाने से गांव के लोगों में दहशत फैल गई।
इसके बाद में खेतों में काम करने पहुंचे लोग अपने साथ पीपा आदि ले गए और श्रमिकों केे काम करने के दौरान एक व्यक्ति लगातार पीपा बजाकर शोर शराबा करता रहा। गांव के लोगों का आरोप है कि कई बार बाघ देखे जाने के बाद वनकर्मियों को सूचना दी जाती है लेकिन कोई भी मौके पर पहुंचने की जरूरत नहीं समझता है। बाघ के कारण श्रमिक खेतों में काम करने से मना कर देते हैं और मजदूरी करने खुटार, मैलानी चले जाते हैं। यदि बाघ को जल्द ही जंगल में नहीं खदेड़ा गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
गांव नरौठा देवीदास में बाघ देखे जाने की कोई जानकारी नहीं मिली है। इस तरह की कोई सूचना मिलती है तो जांच कराई जाएगी।
डीएस यादव, वन क्षेत्राधिकारी खुटार रेंज