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हांका लगाने के अलावा कोई विकल्प नहीं

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बरेली। वन विभाग के अधिकारी एक तरफ लोगों का गुस्सा शांत करने के लिए यह दावा कर रहे हैं कि जरूरत पड़ी तो हाथियों को ट्रैक्युलाइज कर नेपाल भेज दिया जाएगा लेकिन दूसरी तरफ यह भी स्वीकार कर रहे हैं कि ऐसा करना मुमकिन नहीं है और हाथियों को सिर्फ हांका लगाकर ही वापस नेपाल भेजा जा सकता है।
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हाथी पिछले दस दिनों में तमाम गांवों में किसानों की फसलें बरबाद कर चुके हैं, इससे लोगों में दहशत के साथ गुस्सा भी बढ़ रहा है। इस बीच वन विभाग की भूमिका लोगों को हाथियों के नजदीक जाने से रोकने भर की दिखाई दी है। लोगों का गुस्सा शांत करने के लिए अब तक अधिकारी कई बार उनके बीच जरूरत पड़ने पर हाथियों को ट्रैक्युलाइज करने का दावा कर चुके हैं, लेकिन वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का साफ कहना है कि यह मुमकिन नहीं है। उनका कहना है कि बारिश से अब गांवों के रास्तों पर कीचड़ भर गया है। धान के लिए खेत भी जोत दिए गए हैं। पूरे समय साथ रहने वाले दोनों हाथियों को बेहोश करने के लिए पहले अलग-अलग करना होगा। एक को बेहोश कर उसे शिफ्ट करने में कामयाबी मिल भी गई तो दूसरा हाथी उग्र होकर भारी नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा बेहोश हाथी का हार्ट अगर उसके वजन से दब जाए तो उसके मरने का भी खतरा रहता है। अर्द्धबेहोशी में हाथी खड़ा रहता है। लेकिन उसे वाहन में लादने के लिए पीछे से धकेलने के लिए भी दो एक्सपर्ट हाथी चाहिए होते हैं। ऐसे हाथी असम में ही हैं। बारिश से रपटीले रास्तों पर कोई वाहन हाथी को लादने कैसे खेतों तक जाएगा, यह भी सवाल है।
दूसरी समस्या यह है कि बेहोश करने के बाद भी हाथियों को किसी चिड़ियाघर में नहीं भेजा जा सकता क्योकि इस पर सुप्रीम कोर्ट की पाबंदी है। पीलीभीत के जंगल में भी इन्हें इसलिए नहीं छोड़ा जा सकता क्योकि वह जंगल बेहद सघन है। दुधवा में हाथी पहले से ज्यादा हैं। उत्तराखंड भी इसी वजह से हाथियों को लेने से इंकार कर सकता है। लिहाजा हांका लगाकर उन्हें नेपाल भेजने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं है। यही वजह है कि अब हांका के लिए पश्चिम बंगाल से एक्सपर्ट बुलाए गए हैं।
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