पीलीभीत। वन विभाग की तमाम कोशिशों के बाद भी पकड़ दूर रही बाघिन शिकारियों के फंदे में फंस गई। शनिवार सुबह आठ बजे ग्रामीणों ने सूचना वन विभाग को दी तो हड़कंप मच गया। उच्चाधिकारियों की अनुमति पर सूचना के करीब सात घंटे बाद रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर बाघिन को बेहोश कर पकड़ा गया। फिलहाल जाल किसने और कब लगाया, वन अफसर इसकी छानबीन में लगे हैं। सामाजिक वानिकी प्रभाग के डीएफओ संजीव कुमार के मुताबिक मामले में अभी केवल विभागीय केस दर्ज किया जाएगा।
विकासखंड ललौरीखेड़ा के आबादी क्षेत्र में पिछले दिनों एक बाघिन आ पहुंची थी। सामाजिक वानिकी प्रभाग की टीम बाघिन की निगरानी कर रही थी। पिछले दो-तीन से बाघिन हरचुइया गांव के आसपास देखा जा रही थी। वन विभाग उसे पकड़ने के लिए कोशिश में जुटा था। इधर, शनिवार सुबह आठ बजे गांव के कुछ ग्रामीण खेतों की ओर गए तो उन्हें बाघिन की गुर्राहट सुनाई दी। आनन फानन में ग्रामीणों ने सूचना पर वन विभाग को दी। मौके पर पहुंची तो बाघिन को एक गन्ने के खेत में शिकारियों द्वारा लगाए गए जाल (प्लास्टिक की रस्सी से बना) में फंसा पाया। इसके बाद जानकारी पर पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल, सामाजिक वानिकी प्रभाग के डीएफओ संजीव कुमार टीम के साथ मौके पर पहुंचे। वन अफसरों के जानकारी पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव पीके शर्मा ने बाघिन को ट्रैंक्युलाइज करने की अनुमति दी। दोपहर बाद 3:17 बजे रेस्क्यू ऑपरेेशन शुरू किया गया। ट्रैक्टर पर सवार होकर पहुंचे पीटीआर के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दक्ष गंगवार ने बाघिन को दूसरी डार्ट में बेहोश किया। पहली डार्ट मिस हो गई। बाघिन के बेहोश होने की तस्दीक होने के बाद वनकर्मियों ने उसे बमुश्किल जाल काटकर निकाला। टीम में शामिल डॉ. दक्ष गंगवार, डॉ. एसके राठौर और डॉ. राजुल ने बाघिन का परीक्षण किया। बाघिन के अगले पैर में जाल की रगड़ लगने से मामूली चोट पाई गई।
पीटीआर (पीलीभीत टाइगर रिजर्व) के डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल ने बताया कि तीन से पांच साल उम्र की बाघिन को सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर लिया गया है। बाघिन जाल में फंसी पाई गई। अभी फिलहाल इसे वन रेंज ले जाया जा रहा है। उच्चाधिकारियों के निर्देश के बाद ही इसे छोड़ा जाएगा। ऑपरेशन के दौरान वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया की टीम भी मौजूद रहीं।