गरीबों को मूलभूत सुविधाओं को देने का सरकार भले ही बढ़-चढ़कर दावा कर रही है लेकिन रविवार रात दावे की पोल खुल गई। नवाबगंज में झोपड़ी डालकर गुजर बसर कर रही वृद्धा की ठंड और भूख से मौत हो गई। सुबह वृद्धा के न दिखने पर ग्रामीण पहुंचे तो उसकी लाश पड़ी थी। इसकी सूचना पुलिस और प्रशासन को दी गई लेकिन किसी के न पहुंचने पर लोगों ने आपस में चंदा एकत्र कर अंतिम संस्कार किया।
नगर के रामलीला मैदान के पास हाईवे किनारे 70 वर्षीय वृद्ध महिला बीते दस सालों से झोपड़ी डालकर गुजर बसर कर रही थी। राहगीर व पास पड़ोस के लोगों की मेहरबानियों पर वह जिंदा थी। बताया गया कि रविवार की रात कड़ाके की ठंड और भूख ने उसकी जान चली गई। सोमवार की सुबह लोग पहुंचे तो जानकारी हुई। ग्रामीणों ने मामले की सूचना तहसील प्रशासन व पुलिस को दी। किसी के न पहुंचने पर लोगों ने आपस में चंदा जुटाया और अंतिम संस्कार किया।
शांति देवी के रूप में हुई पहचान
पड़ोस में रहने वाली बुजुर्ग महिलाओं ने बताया कि वृद्धा का नाम शांति देवी था। वह बनारस की रहने वाली थी। उसका ससुराल नवाबगंज के गेला गांव था। उसकी शादी एक सरकारी शिक्षक के साथ हुई थी। विवाह के कई सालों तक संतान नहीं हुई। कुछ समय पहले उसके पति की मौत हो गई। इसके बाद से वह नगर में किराए पर रहने लगी। बाद में लोगों ने उसे मोहल्ले से भी निकाल दिया। इसके बाद वह रामलीला मैदान में झोपड़ी बनाकर रहने लगी।
वृद्धा के मौत की सूचना मिली तो हल्का लेखपाल को जांच पड़ताल के आदेश दिया गया था।
- डॉ. अमरेश, एसडीएम, नवाबगंज
मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल की गई है। मामले से अधिकारियों से अवगत करा दिया गया है।
- जैनेंद्र कुमार, हल्का लेखपाल