भाजपा के प्रदेश संगठन मंत्री सुनील बंसल से मिलने के लिए सिविल लाइंस के एक होटल में डॉक्टरों की एक बैठक बुलाई गई। इनमें भाजपा से टिकट के दावेदार भी शामिल थे। इन डॉक्टरों ने सुनील बंसल और बृज क्षेत्र संगठन मंत्री भवानी सिंह से भाजपा के बदलते चरित्र पर सवाल किए। वे बोले कि पार्टी का बसपाईकरण क्यों किया जा रहा है।
एक पुराने डॉक्टर ने कहा कि भाजपा से उम्मीद थी कि वह नगर निगम में 15 साल बाद अपना मेयर बनाएगी, लेकिन जो चर्चाएं बाहर गईं, जनता में उसका मेसेज ठीक नहीं है। अब लड़ाई असली और नकली भाजपा की है। भाजपा को बसपा संस्कृति की ओर ले जाने का खामियाजा उठाना होगा। एक डॉक्टर ने तो यहां तक कह दिया कि अगर भाजपा की पुरानी सोच पर ही सब कुछ चलता तो संगठन और वरिष्ठ नेताओं को बाहर से आकर इतनी ताकत नहीं लगानी पड़ती। डॉक्टरों ने हाथ जोड़कर उनका नाम न छापने की गुजारिश के साथ बताया कि सुनील बंसल के सामने सुबह 9.30 से 10.30 बजे तक आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा।
खास बात यह रही कि इस बैठक में आईएमए अध्यक्ष डा. प्रमेंद्र महेश्वरी मौजूद नहीं थे। उनका कहना था कि डॉक्टरों की मीटिंग में उनको बुलाया नहीं गया, लेकिन डॉक्टरों को संगठन में अपनी बात रखने का हक है। सूत्रों के अनुसार माहौल गरमाता देखकर सुनील बंसल को कहना पड़ा कि कोई भी व्यक्ति संगठन से बड़ा नहीं हो सकता। अगर चुनाव बाद कोई शिकायत मिलती है तो उसकी चिंता करने के लिए संगठन है। आप बिना चिंता करे चुनाव लड़ाइए। इस मामले में बैठक में मौजूद रहे पार्टी पदाधिकारी और नेताओं ने बाहर आकर हाथ जोड़कर कहा कि उनके नाम पहचान तक न छापें। महानगर अध्यक्ष उमेश कठेरिया ने कहा कि वे बैठक में थे ही नहीं।