जो गाड़ी बुधवार को शाहजहांपुर से बरेली तक नंबर प्लेट हटा कर और अनधिकृत नीली बत्ती बता लगा कर दौड़ी बगैर नंबर है नंबर यूपी-27-एई-0333 और ये पकड़े गए लोगों में से एक कुलदीप के नाम से शाहजहांपुर में ही खरीदी गई है। जाहिर है उनके पास इसके कागजात यानी आरसी भी होगी? बरेली पुलिस ने कार को सीज कर ली लेकिन बिना ये पड़ताल किए दोनों को छोड़ दिया कि आखिर वे वीआईपी बन कर किस मुहिम पर निकले थे। जाहिर सी बात है कि ऐसी हरकत जरायम पेशा लोग भी पुलिस को झांसा देने के लिए करते हैं। पुलिस ने इतना तो पता किया कि वह नवनीत नाम के किसी अफसर को छोड़ने आए (जो हो सकता है फर्जी कहानी का हिस्सा हो) लेकिन ये नवनीत साहब हैं कौन ये पता करने की जरूरत ही नहीं समझी गई। ऐसे में ये शक होना लाजिमी है कि पुलिस सारी कहानी जान कर किसी को बचाने के लिए चुप बैठ गई है।
अपने को बिजली विभाग का कैशियर बताने वाले कुलदीप और सुधीर जिस कथित अधिकारी को बरेली छोड़ने आए थे, उसका नाम नवनीत बताया जा रहा है। इंस्पेक्टर कैंट कह रहे हैं कि कुलदीप ने सिर्फ नवनीत का नाम बताया और इसके बाद अपना फोन बंद कर लिया। यानी उनके मुताबिक ये बात उन्होंने फोन से पूछी जबकि कुलदीप को बाकायदा हथकड़ी लगाकर थाने में रखा गया था। पुलिस का कहना है कि कुलदीप और सुधीर के पास न तो कार के कोई कागज थे और न ही गाड़ी पर कोई नंबर था। इस पर पुलिस ने कार को सीज कर दिया। साथ ही पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ दफा 34 के तहत कार्रवाई की। जमानती अपराध होने के कारण उन्हें रात में ही थाने से जमानत दे दी गई। आगे की तहकीकात के लिए कुलदीप से फोन पर बात की उसने इंस्पेक्टर को बताया कि वह नवनीत नाम के अधिकारी को बरेली छोड़ने आया था। यह अधिकारी कौन था यह पूछने पर कुलदीप ने अपना फोन बंद कर दिया।
एसी भी नहीं लगा सकता है नीली बत्ती
शाहजहांपुर शहर के एक्सईएन (विद्युत) विवेक पटेल बताते हैं कि उनके डिपार्टमेंट में नवनीत नाम के कोई अधिकारी नहीं हैं। रही बात नीली बत्ती की तो उनके विभाग के एसी भी अपनी कार पर नीली बत्ती नहीं लगा सकते हैं। एक्सईएन ने बताया कि कुलदीप और सुधीर नीली बत्ती लगाकर कार कैसे चला रहे थे, इसका पता किया जा रहा है।